Edited By Niyati Bhandari,Updated: 06 Oct, 2026 01:25 AM
Sharadiya Navratri Katha: शारदीय नवरात्रि और महिषासुर वध का क्या संबंध है? जानिए कैसे देवताओं के तेज से प्रकट हुईं मां दुर्गा, 9 दिनों के युद्ध के बाद कैसे हुआ महिषासुर का अंत और घटस्थापना का शुभ मुहूर्त।
Sharadiya Navratri Katha: हर वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत होती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन उत्सव में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग दिव्य स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्तजन पूरे विधि-विधान के साथ व्रत रखते हैं और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, जिससे जीवन में सुख-शांति आती है और मां भगवती की कृपा प्राप्त होती है। क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि मनाने की इस परंपरा की शुरुआत कैसे हुई? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व का सीधा संबंध महिषासुर और मां दुर्गा के बीच हुए भीषण संग्राम से जुड़ा हुआ है।
नवरात्रि में जो श्रद्धा भाव से मां भगवती की स्तुति करता है, मां आदि शक्ति उन्हें शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। वही मनुष्य के अयुदय के समय घर में लक्ष्मी का रूप बना कर स्थित हो जाती है। वास्तव में नवरात्रि पर्व है आध्यात्मिक उन्नति और अनुभूति का, जिसमें मनुष्य को अपने विकारों पर नियंत्रण करने तथा अपने कल्याण के लिए शुद्ध सात्विक आचार, विचार, आहार तथा जप-तप आदि धर्म कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।

Mahishasura Vadh Katha: प्राचीन काल में देवताओं और असुरों में 100 वर्षों तक हुए घोर युद्ध में देवताओं की सेना परास्त हो गई थी और महिषासुर इंद्र बन बैठा था। देवताओं ने अपनी हार का सारा वृत्तांत भगवान श्री विष्णु और शंकर जी से कह सुनाया, ‘‘महिषासुर सूर्य, चन्द्रमा, इन्द्र, अग्नि, वायु, यम, वरुण तथा अन्य देवताओं के सब अधिकार छीन कर स्वयं सबका अधिष्ठाता बन बैठा है।’’
यह सुनकर भगवान श्री विष्णु और शंकर जी बड़े क्रोधित हुए। तभी उनके तथा अन्य देवताओं के मुख से मां भगवती का तेजोमय रूप प्रकट हुआ, तथा सभी ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र, दिव्य वस्त्र, उज्ज्वल हार, दिव्य आभूषण भेंट करके मां का सम्मान किया और कहा,‘‘देवी! आपकी जय हो।’’ इसके साथ ही महर्षियों ने भक्ति भाव से विनम्र होकर उनकी स्तुति की।
भीषण युद्ध में देवी ने जब महिषासुर को मार कर असुरों की सेना का संहार कर दिया, तब इन्द्र आदि समस्त देवताओं ने सिर तथा शरीर को झुकाकर मां भगवती की स्तुति की और बोले- ‘‘जिस अतुल प्रभाव और बल का वर्णन भगवान विष्णु, शंकर और ब्रह्माजी भी नहीं कर सके, वही चंडिका देवी इस संपूर्ण जगत का पालन करें और अशुभ भय का नाश करें। जिस देवी ने अपनी शक्ति से यह जगत व्याप्त किया है और जो संपूर्ण देवताओं तथा महर्षियों की पूजनीय हैं, उन अंबिका को हम भक्तिपूर्वक नमस्कार करते हैं, वह हम सब का कल्याण करें।’’
तब मां भगवती दुर्गा ने देवताओं को आशीर्वाद देते हुए कहा,‘‘हे देवताओ! तुमने जो मेरी स्तुति की है अथवा ब्रह्माजी ने जो मेरी स्तुति की है, वह मनुष्यों को कल्याणमयी बुद्धि प्रदान करने वाली है।’’
मां दुर्गा और महिषासुर के बीच लगातार नौ दिनों तक भयंकर युद्ध चला। इस दौरान असुर ने अनेक रूप बदलकर देवी को चुनौती देने का प्रयास किया, लेकिन मां दुर्गा के आगे उसकी एक न चली। अंततः दसवें दिन देवी ने महिषासुर का वध कर दिया। महिषासुर के वध के साथ ही देवताओं और पृथ्वी लोक को उसके अत्याचारों से मुक्ति मिली। देवी दुर्गा की इसी महान विजय की स्मृति में हर साल नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है और दसवें दिन विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मनाया जाता है।
वेद, उपनिषद्, पुराण, इतिहास आदि सभी प्राचीन ग्रंथों में सर्वत्र मां भगवती आदि शक्ति की ही अपरंपार महिमा का वर्णन है। प्रतिपदा से नवमी तक मां नवदुर्गा के नवरूपों की पूजा-आराधना, पाठ, जप, यज्ञ-अनुष्ठान, व्रत, दुर्गा सप्तशती का पाठ आदि मां भगवती आदिशक्ति को प्रसन्न करने के लिए किए जाते हैं।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 2026
घटस्थापना तिथि: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
घटस्थापना शुभ मुहूर्त: सुबह 06:20 बजे से सुबह 10:12 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
