वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: शिव डोल की प्रसिद्धि का कारण उत्तर दिशा स्थित शिव सागर टैंक

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 08:56 AM

shiva dol sivasagar

Shiva Dol, Sivasagar: भारत का एक प्रमुख पर्यटन और धार्मिक तीर्थ स्थल शिव डोल, असम के शिवसागर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर समूह है, जहां मुख्य मंदिर शिव डोल है तथा विष्णु डोल और देवी डोल भी इस परिसर का हिस्सा है। यह अहोम वास्तुकला (नीलाचल शैली) का...

Shiva Dol, Sivasagar: भारत का एक प्रमुख पर्यटन और धार्मिक तीर्थ स्थल शिव डोल, असम के शिवसागर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर समूह है, जहां मुख्य मंदिर शिव डोल है तथा विष्णु डोल और देवी डोल भी इस परिसर का हिस्सा है। यह अहोम वास्तुकला (नीलाचल शैली) का अद्भुत नमूना है। यह शिवसागर तालाब (बोरपुखुरी) के दक्षिण किनारे स्थित है। यह मंदिर, एक विशाल शिवलिंग को समर्पित है, जो 8 फीट ऊंचा है। विश्व भर के पर्यटक इस पुण्य स्थल की यात्रा पर बड़ी संख्या में आते हैं। इसे 1734 में अहोम रानी अंबिका ने बनवाया था, जो अहम राजा स्वर्गदेव रुद्र सिंह की पत्नी थीं। शिव डोल भारत के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में से एक है, जिसकी ऊंचाई 177 फीट है, और इसके सोने के गुंबद (कोलसी) और जटिल वास्तुकला इसे अहोम संस्कृति और स्थापत्य कला का एक बेहतरीन उदाहरण बनाते हैं। शिव डोल अहोम राजाओं के गौरवशाली अतीत की झलक दिखाता है।

शिव डोल के उत्तर दिशा में, शिवसागर टैंक हैं जोकि एक विशाल कृत्रिम तालाब है। इसे भी 1734 में रानी अंबिका द्वारा ही बनवाया गया था। यह तालाब 129 एकड़ (52 हेक्टेयर) के क्षेत्र में फैला हुआ है और यह भारत के सबसे बड़े कृत्रिम तालाबों में से एक है। तालाब के आसपास कई अन्य ऐतिहासिक स्थल हैं, जैसे कि शिव डोल, रोल घर और तलातल घर। शिवसागर टैंक एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है, जहां लोग पिकनिक मनाने और इतिहास को जानने आते हैं। यहां का प्रमुख उत्सव महाशिवरात्रि है। शिव डोल की प्रसिद्धि का कारण हैं इसकी वास्तुअनुकूल भौगोलिक स्थिति।

जोकि इस प्रकार है मंदिर परिसर की उत्तर दिशा में विशाल शिवसागर टैंक है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, जिस भवन की उत्तर दिशा में किसी प्रकार की नीचाई, नदी, तालाब, गहरी खाई इत्यादि होते हैं, वह स्थान निश्चित ही प्रसिद्धि पाता है। जैसे कि जम्मू, कटरा स्थित वैष्णो देवी मंदिर एवं शिर्डी स्थित सांई बाबा के मंदिर की उत्तर दिशा में भी निचाई है। मदुरै स्थित मीनाक्षी मंदिर को उत्तर दिशा में बहने वाली वैगै नदी के कारण ही प्रसिद्धि मिली है। इसी प्रकार दक्षिण भारत के सभी प्रसिद्ध मंदिरों जैसे ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम, गुरुवयूर मंदिर त्रिशुर, कण्ठेश्वरा मंदिर नंजनगुड मैसूर, श्रीरंगनाथ स्वामी श्रीरंगपत्तनम्, पद्मनाभ स्वामी मंदिर तिरुअन्नतपुरम्, सुचीद्रम टेम्पल कन्याकुमारी, वडक्कन्नाथन मंदिर त्रिशुर इत्यादि मंदिरों में उत्तर दिशा में पानी के कुण्ड हैं या नदी बह रही है। उत्तर दिशा स्थित शिव सागर टैंक के कारण ही शिवडोल असम और पूर्वोत्तर भारत में एक विशेष स्थान रखता है।

वास्तु गुरू कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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