Edited By Niyati Bhandari,Updated: 21 May, 2026 10:58 AM

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर में सिख धार्मिक और विरासत संपत्तियों पर नियंत्रण के लिए कई निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया। भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने...
नई दिल्ली, (प.स.): सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर में सिख धार्मिक और विरासत संपत्तियों पर नियंत्रण के लिए कई निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया। भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता चरणजीत सिंह से कहा कि वह अपनी शिकायतें संसद की याचिका समिति के समक्ष उठाएं।
दिल्ली के एक सिख संगठन से जुड़े सिंह स्वयं अदालत में पेश हुए और अपना पक्ष रखा। एक समय उन्होंने पीठ के सामने झुककर नोटिस जारी करने की अपील की। सिंह ने कहा, ‘मैं आपके सामने नतमस्तक हूं। कृपया मेरी याचिका पर नोटिस जारी करें।’ इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत के दरवाजे हमेशा खुले हैं, लेकिन मांगी गई राहत विधायी क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
चीफ जस्टिस ने कहा, ‘अदालत आपके लिए है, आप जब चाहे आ सकते हैं। लेकिन इन मुद्दों के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता है, जिसके लिए आपको संसद जाना होगा। आपको संसद की याचिका समिति से संपर्क करना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘यदि हम इसमें हस्तक्षेप करते हैं, तो ऐसा प्रतीत हो सकता है कि धार्मिक मामलों में दखल दिया जा रहा है।’
हालांकि पीठ ने याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि यदि वह संसद से मिलने वाले जवाब से संतुष्ट नहीं हों, तो दोबारा उच्चतम न्यायालय आ सकते हैं। इस जनहित याचिका में देशभर में सिख धार्मिक और विरासत संपत्तियों के प्रबंधन की व्यवस्था में व्यापक बदलाव का अनुरोध किया गया था।