‘वंदे मातरम्’ गायन के खिलाफ नई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

Edited By Updated: 28 Oct, 2026 07:53 AM

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सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सभी 6 अंतरे का गायन अनिवार्य बनाने वाले कानून को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर विचार करने को लेकर मंगलवार को सहमति जताई।

नई दिल्ली (एजैंसी): सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सभी 6 अंतरे का गायन अनिवार्य बनाने वाले कानून को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर विचार करने को लेकर मंगलवार को सहमति जताई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने भीमराव दुर्योधन बोरकर और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई.ए.एस.) के पूर्व अधिकारी बालकृष्णन सत्यभामा मावोजी की याचिकाओं पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

 शीर्ष अदालत ने इन याचिकाओं को ऐसी ही अन्य याचिकाओं के साथ संबद्ध करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 नवम्बर की तारीख तय की है। बोरकर ने अपनी याचिका में दलील दी है कि गृह मंत्रालय के 28 जनवरी और 9 जुलाई, 2026 के आदेश 79 साल पुरानी उस परंपरा को गैर-कानूनी तरीके से बदल देते हैं, जिसमें बिना किसी धार्मिक संदर्भ वाले केवल 2 अंतरे गाए जाते थे, लेकिन अब संपूर्ण राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें ‘स्पष्ट रूप से मुसलमानों के खिलाफ अपमानजनक बातें’ कही गई हैं।

 याचिका में कहा गया है, ‘आधिकारिक संस्करण को बजाने और गाने पर निर्देश देने की आड़ में विवादित आदेशों के जरिए मौजूदा राष्ट्रगीत को खारिज कर दिया गया है, इसके स्थान पर एक नया राष्ट्रगीत थोप दिया गया है, जो ‘आनंदमठ’ का 6 अंतरे वाला गृहयुद्ध का गीत है और इसमें असंवैधानिक, मूर्तिपूजन तथा इस्लाम-विरोधी सामग्री शामिल है।’

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