क्या सास-बहू एक ही कलश से कर सकती हैं वरलक्ष्मी पूजा, जानें क्या कहती है परंपरा

Edited By Updated: 27 Aug, 2026 01:38 PM

varalakshmi vrat kalash rules

सनातन धर्म में वरलक्ष्मी व्रत का बहुत खास महत्व है। वरलक्ष्मी व्रत की पूजा में कलश स्थापना को बहुत खास माना जाता है, क्योंकि कलश को स्वंय मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है।

Varalakshmi Vrat Kalash Rules : सनातन धर्म में वरलक्ष्मी व्रत का बहुत खास महत्व है। वरलक्ष्मी व्रत की पूजा में कलश स्थापना को बहुत खास माना जाता है, क्योंकि कलश को स्वंय मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। ऐसे में कई परिवारों में अक्सर कंफ्यूजन बनी रहती है कि अगर एक ही घर में सास और बहू एक साथ कलश स्थापित कर सकती है या दोनों को अलग-अलग कलश स्थापना करनी चाहिए। तो आइए जानते हैं कलश स्थपना  से जुड़ी खास बातों के बारे में-

Varalakshmi Vrat Kalash Rules

क्या सास-बहू एक ही कलश से पूजा कर सकती हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि एक ही घर में सास और बहू वरलक्ष्मी का व्रत रख रही हैं, तो वे एक ही कलश की स्थापना करके वरलक्ष्मी की पूजा कर सकती हैं। शास्त्रों के अनुसार, एक ही घर में मां लक्ष्मी के प्रतीक स्वरूप दो अलग-अलग कलशों की स्थापना करना जरूरी नहीं हैं। परिवार की मुख्य पूजा स्थान पर एक ही कलश स्थापित करके पूरा परिवार मिलकर पूजा कर सकता है।  

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पूजा से जुड़े मुख्य नियम और परंपराएं

यदि परिवार एक साथ रहता है, तो सास और बहू मिलकर एक ही कलश की पूजा कर सकती है। दोनों एक साथ  बैठकर व्रत की कथा पढ़ और सुन सकती है और आरती कर सकती है। 

यदि सास और बहू अलग-अलग घरों में रहती हैं, तो वे अपने-अपने घर में कलश की स्थापना करके वरलक्ष्मी व्रत का पूजन करेंगी। 

भले ही कलश एक हो, लेकिन पूजा का संकल्प सास और बहू दोनों को अलग-अलग लेना चाहिए। पूजा के बाद हाथ में बांधा जाने वाला पवित्र डोरा भी दोनों महिलाएं अपने-अपने हाथों में अलग-अलग बांधेंगी।

पूजा के बाद प्रसाद और नौ तरह के फल या पकवान का वितरण पूरे परिवार में मिलकर किया जाता है।

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शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

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