Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Aug, 2026 12:08 PM

हिंदू धर्म में वरलक्ष्मी व्रत का बहुत खास महत्व है। वरलक्ष्मी व्रत दक्षिण भारत के साथ -साथ अब पूरे देश में बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मानाया जाता है। हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष के अंतिम तिथि को वरलक्ष्मी का व्रत रखा जाता है।
Varalakshmi Vrat Katha : हिंदू धर्म में वरलक्ष्मी व्रत का बहुत खास महत्व है। वरलक्ष्मी व्रत दक्षिण भारत के साथ -साथ अब पूरे देश में बहुत श्रद्धा और उत्साह के साथ मानाया जाता है। हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष के अंतिम तिथि को वरलक्ष्मी का व्रत रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से और पूरे विधि-विधान के साथ वरलक्ष्मी की पूजा करने और व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कई लोगों के मन में यह सवाल बना रहता है कि वरलक्ष्मी व्रत को इतना खास क्यों माना जाता है। तो आइए जानते हैं चारूमति और मां लक्ष्मी की कथा के बारे में-
वरलक्ष्मी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मगध राज्य में कुंडी नामक एक नगर था। कथानुसार कुंडी नगर का निर्माण स्वर्ग से हुआ था। इस नगर में एक ब्राह्मणी नारी चारूमति अपने परिवार के साथ रहती थी। चारूमति कर्तव्यनिष्ठ नारी थी जो अपने सास, ससुर एवं पति की सेवा और मां लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना कर एक आदर्श नारी का जीवन व्यतीत करती थी।एक रात्रि में चारुमति को मां लक्ष्मी ने प्रसन्न होकर उसके स्वप्न में दर्शन दिए और बोली की, "चारुमति हर शुक्रवार को मेरे निमित्त मात्र वरलक्ष्मी व्रत से किया करों। इस व्रत के प्रभाव से तुम्हे मनोवांछित फल प्राप्त होगा।"

अगले सुबह चारुमति ने मां लक्ष्मी द्वारा बताए गए वरलक्ष्मी व्रत को समाज की अन्य नारियों के साथ विधिवत पूजन किया। पूजन के संपन्न होने पर सभी नारियां कलश की परिक्रमा करने लगीं, परिक्रमा करते समय समस्त नारियों के शरीर विभिन्न स्वर्ण आभूषणों से सज गए। उनके घर भी स्वर्ण के बन गए यहीं नहीं उनके इस पूजा में घोड़े, हाथी, गाय आदि पशु भी आ गए। सभी नारियां चारुमति की प्रशंसा करने लगें। क्योंकि चारुमति ने ही उन सबको इस व्रत विधि के बारे में बताया था। कालांतर में यह कथा भगवान शिव जी ने माता पार्वती को सुनाई थी। इस व्रत को सुनने मात्र से लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है।
बताते चलें हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए वरलक्ष्मी का व्रत किया जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी की वरलक्ष्मी के रुप में पूजा की जाती है। वरलक्ष्मी देवी का अवतार दुधिया महासागर से हुआ था जिसे क्षीर महासागर के नाम से जाना जाता है। वरलक्ष्मी का रंग दुधिया महासागर के रंग के रुप में वर्णित किया जाता है और वो इस रुप में रंगीन वस्त्रों में सजी होती है।

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