Edited By Sarita Thapa,Updated: 23 Sep, 2026 05:45 PM

भगवान श्रीकृष्ण की आराध्या और प्रेम की देवी के रूप में पूजनीय श्री राधा रानी को आपने कई नामों से सुना होगा- राधा, राधिका, वृषभानुनंदिनी और बरसाने वाली। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राधा रानी को ‘किशोरी जी’ या किशोरी जू कहकर क्यों पुकारा जाता है।
Why Is Radha Rani Called Kishori Ji : भगवान श्रीकृष्ण की आराध्या और प्रेम की देवी के रूप में पूजनीय श्री राधा रानी को आपने कई नामों से सुना होगा- राधा, राधिका, वृषभानुनंदिनी और बरसाने वाली। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राधा रानी को ‘किशोरी जी’ या किशोरी जू कहकर क्यों पुकारा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कहा जाता है कि राधा रानी सदैव किशोरावस्था में रहती है। आप सभी ने भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कई लीलाओं के बारे में सुना होगा, लेकिन राधा रानी की लीलाओं के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उनके किशोरी कहलाने के पीछे भी दिव्य और अद्भुत लीला का वर्णन मिलता है। एक ऐसी लीला, जिसने उन्हें हमेशा के लिए किशोरी बना दिया। तो आइए जानते हैं कि आखिर वह लीला क्या थी, इसमें कौन-कौन शामिल थे और ऐसा क्या हुआ था कि राधा रानी को ‘किशोरी’ नाम मिला?
पौराणिक कथाओं के अनुसार ऋषि अष्टावक्र महान विद्वान कहोड़ ऋषि और माता सुजाता के पुत्र थे। ऋषि अष्टावक्र जब अपनी माता के गर्भ में थे तो उन्हें अपने पिता से वेदों और शास्त्रों का ज्ञान सुनने को मिलता था और उन्होंने अपने पिता से गर्भ के अंदर से कहा कि केवल शास्त्रों का अध्ययन कर लेना ही वास्तविक ज्ञान नहीं है। सच्चा ज्ञान मनुष्य के भीतर मौजूद चेतना और आत्मबोध से प्राप्त होता है। उनके अनुसार शास्त्र मार्ग दिखाने वाले शब्द हैं, जबकि सत्य का अनुभव स्वयं के भीतर किया जाता है। यह सुनकर ऋषि कहोड़ को बहुत क्रोध आया और उन्होंने गर्भ के अदंर अपने पुत्र से कहा कि तुम अभी गर्भ में हो और तुम मुझे ज्ञान में चुनौती दे रहे हो। क्रोध में आकर उन्होंने अष्टावक्र को श्राप दे दिया कि जन्म के समय उनके शरीर के कई अंग टेढ़े होंगे। धार्मिक कथा के अनुसार, इसी श्राप के कारण अष्टावक्र का शरीर आठ स्थानों से मुड़ा हुआ था और अष्टावक्र नाम उनके शरीर के आठ स्थानों से वक्र होने के कारण ही पड़ा।

कहा जाता है कि ऋषि अष्टावक्र जब भी किसी स्थान पर जाते तो लोग उनके अंगों को देखकर उनका मज़ाक बनाते और हंसने लगते। इससे क्रोधित होकर ऋषि अष्टावक्र अक्सर लोगों को श्राप दे दिया करते थे। एक बार ऋषि अष्टावक्र बरसाने आए और उनके भेंट राधा रानी से हुई। राधा रानी जब ऋषि अष्टावक्र को देखा तो उनके मुख पर मुस्कान आ गई, तब ऋषि अष्टावक्र को लगा कि राधा रानी भी उनके रुप को देखकर हंस रही हैं और क्रोध में उन्होंने राधा रानी को श्राप देना चाहा, लेकिन श्रीकृष्ण ने ऋषि अष्टावक्र से विनम्र निवेदन करते हुए कहा कि एक बार पहले वह राधा रानी से उनकी मुस्कुराहट का कारण जान लें।
तभी राधा रानी ने ऋषि अष्टावक्र के सामने अपनी मुस्कान का वास्तविक कारण बताया। उन्होंने कहा कि उनकी हंसी ऋषि के शरीर के टेढ़ेपन को देखकर बिल्कुल नहीं थी। राधा जी ने कहा कि जब उन्होंने ऋषि अष्टावक्र को देखा, तो उन्हें उनके भीतर परमात्मा के दर्शन हो रहे हैं। उनके ज्ञान, आत्मबोध और सत्य की अनुभूति ने राधा रानी के हृदय को आनंद से भर दिया था और उसी भाव के कारण उनके मुख पर मुस्कान आ गई। राधा रानी की यह बात सुनकर ऋषि अष्टावक्र का क्रोध पूरी तरह शांत हो गया और वे अत्यंत प्रसन्न हुए। राधा जी की आध्यात्मिक दृष्टि और उनके भाव से प्रभावित होकर ऋषि अष्टावक्र ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि वे सदैव किशोरी स्वरूप में रहें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी वरदान के कारण श्री राधा रानी को प्रेम और श्रद्धा से किशोरी जी कहकर पुकारा जाता है।

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