Shri Krishna and Pandavas story : क्या पांडवों को पहले ही पता था कलियुग का रहस्य? श्रीकृष्ण और पांडवों की इस कथा में छिपा है जवाब

Edited By Updated: 20 Sep, 2026 12:50 PM

shri krishna and pandavas story

आज के समय में जब हम अपने आसपास तेजी से बदलती दुनिया, रिश्तों में बढ़ती दूरियां, स्वार्थ, लालच और धर्म से दूर होती सोच को देखते हैं, तो मन में एक सवाल जरूर उठता है- क्या हम सच में उस दौर की ओर बढ़ रहे हैं, जिसके बारे में कलियुग को लेकर हजारों साल...

Shri Krishna and Pandavas story : आज के समय में जब हम अपने आसपास तेजी से बदलती दुनिया, रिश्तों में बढ़ती दूरियां, स्वार्थ, लालच और धर्म से दूर होती सोच को देखते हैं, तो मन में एक सवाल जरूर उठता है- क्या हम सच में उस दौर की ओर बढ़ रहे हैं, जिसके बारे में कलियुग को लेकर हजारों साल पहले ही भविष्यवाणियां कर दी गई थीं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को कलियुग के आने वाले समय से जुड़े कुछ ऐसे संकेत बताए थे, जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान रह जाए। कहा जाता है कि इन संकेतों में मनुष्य के व्यवहार, परिवार और समाज में आने वाले बदलावों की झलक मिलती है। लेकिन आखिर श्रीकृष्ण ने पांडवों को कलियुग के बारे में क्या बताया था? क्या आज दिखाई देने वाली कुछ घटनाएं उन्हीं संकेतों से मिलती-जुलती हैं और क्या सच में श्रीकृष्ण की कही बातें आज के समय में सच होती नजर आ रही हैं। तो आइए जानते हैं इससे जुड़ी इससे जुड़ी पौराणिक कथा के बारे में-

Shri Krishna and Pandavas story

इस कथा का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार पांचों पांडव भगवान श्रीकृष्ण के पास आए और कलियुग कैसा होगा और उसमें क्या-क्या होगा, यह जानने की इच्छा जताई। उन्होंने पूछा कि हे श्री कृष्ण आने वाले समय में इस संसार की क्या दशा होगी और मनुष्य के व्यवहार में किस प्रकार का परिवर्तन देखने को मिलेगा। भगवान श्रीकृष्ण ने इसका उत्तर शब्दों में नहीं दिया बल्कि उन्हें समझाने के लिए एक अलग तरीका चुना। श्रीकृष्ण ने पांचों पांडवों से कहा कि वे जंगल के अलग-अलग स्थानों पर जाएं और वहां नज़र आने वाली कोई भी असामान्य घटना को ध्यान से देखें और फिर वापस आने पर अपने-अपने अनुभव मुझे बताएं। पांडवों ने श्रीकृष्ण के कहे अनुसार ही किया।

सबसे पहले युधिष्ठिर वन में भ्रमण कर रहे थे। वहां जाकर उनकी नज़र एक हाथी पर पड़ी। उस हाथी की एक नहीं बल्कि दो सूंड थी। ऐसा दृश्य देख युधिष्ठिर हैरान रह गए और वापस लौट आए। उन्होंने आकर श्रीकृष्ण को सारी बात बताई तो श्रीकृष्ण ने सभी को इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि कलियुग में ऐसे लोग देखने को मिलेंगे जिनकी कथनी और करनी में अंतर होगा। वे लोगों के सामने कुछ और व्यक्त करेंगे लेकिन उनके मन में कोई दूसरा उद्देश्य होगा। वे अपने फायदे के लिए दूसरों का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

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इसके बाद अर्जुन जब वन में घूम रहे थे तो उन्हें वहां एक ऐसा पक्षी दिखाई दिया जिसके पंखों पर वेदों जैसे पवित्र रचनाओं के चिह्न बने हुए थे। लेकिन वह पक्षी एक मृत शरीर पर बैठकर उसे खा रहा था। इसे देखकर अर्जुन हैरान रह गए क्योंकि यह उनके लिए बेहद विरोधाभासी था। वापस आने के बाद जब अर्जुन ने श्रीकृष्ण से इस घटना का रहस्य पूछा, तो पौराणिक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने इसे कलियुग के मनुष्यों के आचरण से जोड़ा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में कुछ लोग धर्म, ज्ञान और सदाचार की बातें तो बहुत करेंगे, लेकिन उनका वास्तविक जीवन उन बातों से बिल्कुल अलग हो सकता है। ऐसे लोग समाज के सामने स्वयं को विद्वान और धार्मिक दिखा सकते हैं, लेकिन उनके भीतर धन, प्रतिष्ठा, पद और निजी स्वार्थ की लालसा अधिक प्रभावी हो सकती है। इस तरह ज्ञान केवल बोलने या दिखाने की चीज बनकर रह जाएगा।

इसके बाद जब भीम वन में घूम रहे थे, तब उन्होंने वहां एक गाय को देखा जो अपने नवजात बछड़े को लगातार चाट रही थी। शुरुआत में यह दृश्य देखने में सामान्य प्रतीत हुआ लेकिन कुछ ही समय में बछड़ा घायल हो गया और पूरी तरह से लहूलुहान हो गया। भीम अपनी आंखों के सामने ऐसे दृश्य को देखकर पूरी तरह से चकित रह गए। जब उन्होंने श्रीकृष्ण से इसका अर्थ पूछा तो कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने बताया कि कलियुग में माता-पिता का अपनी संतान के प्रति लगाव और मोह इस कदर बढ़ जाएगा कि वे उन्हें जीवन के हर फैसले को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश करेंगे और स्वतंत्र रुप ले आगे बढ़ने का मौका ही नहीं देंगे।

आगे कथा के अनुसार सहदेव को वन में एक विचित्र दृश्य दिखाई दिया। उन्होंने देखा कि उनके आसपास कई कुएं मौजूद हैं जो पानी से लबालब भरे हुए हैं, लेकिन उनके बीच एक कुआं ऐसा भी था जो बहुत गहरा था,लेकिन उसमें एक भी बूंद पानी नहीं था। इस दृश्य ने सहदेव को विरोधाभास में डाल दिया। उन्होंने जब श्रीकृष्ण से इसके अर्थ के बारे में पूछा तो श्रीकृष्ण ने कहा कि भविष्य में बहुत-से लोगों के पास सुख-सुविधाएं और धन की प्रचुरता होगी। लोग उत्सवों, शादियों और अपनी इच्छाओं पर खूब खर्च करेंगे, लेकिन उनके आसपास मौजूद भूखे या जरूरतमंद लोगों की परेशानियों पर ध्यान नहीं देंगे और सहायता करने से पीछे हट जाएंगे।

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