Edited By Radhika,Updated: 21 Feb, 2026 01:41 PM

आज के बदलते दौर के साथ खान- पान की चीज़ों में भी बदलाव हो रहा है। चिप्स, बिस्कुट या इंस्टेंट नूडल्स बच्चों, युवाओं के फेवरेट बन रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन चीज़ों को खाने की लत आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। हाल ही में 'जर्नल एडिक्शन'...
नेशनल डेस्क: आज के बदलते दौर के साथ खान- पान की चीज़ों में भी बदलाव हो रहा है। चिप्स, बिस्कुट या इंस्टेंट नूडल्स बच्चों, युवाओं के फेवरेट बन रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन चीज़ों को खाने की लत आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। हाल ही में 'जर्नल एडिक्शन' में छपी स्टडी 'अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की लत क्षमता' ने स्वास्थ्य जगत में खलबली मचा दी है। शोधकर्ताओं का दावा है कि इन डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का दिमाग पर वैसा ही असर होता है, जैसा तंबाकू या निकोटिन का।
दिमाग में कैसे पैदा होती है 'जंक फूड' की गुलामी?
विशेषज्ञों के अनुसार, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) को तैयार करने का तरीका ही ऐसा होता है कि वह सीधे हमारे मस्तिष्क के 'रिवॉर्ड सिस्टम' पर हमला करता है। जैसे ही हम अधिक नमक, चीनी और फैट के खास मिश्रण वाला स्नैक खाते हैं, दिमाग में 'डोपामिन' नामक केमिकल तेजी से रिलीज होता है। यह वही खुशी देने वाला हार्मोन है, जो नशीले पदार्थों के सेवन के दौरान सक्रिय होता है।
यही कारण है कि पेट भरा होने के बावजूद हम पैकेट खत्म होने तक खुद को रोक नहीं पाते। यह चक्र धीरे-धीरे दिमाग को उस 'हाई' का आदी बना देता है, जिससे Craving को कंट्रोलव करना नामुमकिन लगने लगता है।

बच्चों और युवाओं पर बड़ा खतरा
बाजार में मिलने वाले पैक्ड फूड्स का स्वाद, खुशबू और टेक्सचर बच्चों को सबसे ज्यादा आकर्षित करते हैं। रिसर्च बताती है कि कम उम्र में यह आदत लगने से भविष्य में मोटापे के साथ-साथ डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इनमें पोषक तत्वों की भारी कमी होती है, जो शारीरिक और मानसिक विकास को बाधित कर सकती है।
बचाव के आसान रास्ते: खुद को कैसे बदलें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस लत से बचने के लिए कुछ प्रभावी उपाय सुझाए हैं:
- लेबल पढ़ने की आदत: कोई भी पैकेट खरीदते समय उसमें नमक और चीनी की मात्रा जरूर देखें।
- घर के खाने को प्राथमिकता: ताजे फल, सब्जियां और साबुत अनाज को अपनी थाली का हिस्सा बनाएं।
- धीरे-धीरे कटौती: जंक फूड को अचानक बंद करने के बजाय उसकी मात्रा धीरे-धीरे कम करें।