Edited By Mansa Devi,Updated: 01 Mar, 2026 06:45 PM

दुनियाभर में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अनुमान है कि वैश्विक आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा किसी न किसी रूप में किडनी रोग से प्रभावित है।
नेशनल डेस्क: दुनियाभर में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। अनुमान है कि वैश्विक आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा किसी न किसी रूप में किडनी रोग से प्रभावित है। आम तौर पर लोग किडनी की समस्या को सिर्फ डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से जोड़कर देखते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके कारण अब कहीं अधिक व्यापक हो चुके हैं।
बिना लक्षण बढ़ती है बीमारी
किडनी की बीमारी अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। दर्द या गंभीर संकेत न होने के कारण लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। इस दौरान किडनी की रक्त को फिल्टर करने की क्षमता कम होती जाती है। समय पर जांच न होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) अब केवल डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर तक सीमित नहीं है। बदलती जीवनशैली, पर्यावरणीय कारण और आनुवंशिक कारक भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
मोटापा बढ़ा रहा खतरा
मोटापा सिर्फ शुगर का जोखिम नहीं बढ़ाता, बल्कि सीधे किडनी पर भी दबाव डालता है। शरीर का वजन ज्यादा होने पर किडनी को अतिरिक्त काम करना पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा होने से किडनी के ऊतकों में नुकसान और स्कारिंग हो सकती है। आजकल कम उम्र के लोगों में भी मोटापे से जुड़ी किडनी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और वजन नियंत्रण बेहद जरूरी हैं।
धूम्रपान भी बड़ा कारण
स्मोकिंग किडनी के लिए एक खामोश खतरा है। सिगरेट में मौजूद हानिकारक रसायन किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। जिन लोगों को पहले से किडनी संबंधी समस्या है, उनमें धूम्रपान बीमारी को तेजी से बढ़ा सकता है।
ग्रामीण इलाकों में नई चिंता
कुछ क्षेत्रों में ऐसी किडनी बीमारी भी देखी जा रही है, जो डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी नहीं है। इसे क्रॉनिक किडनी डिजीज ऑफ अननोन एटियोलॉजी कहा जाता है। यह समस्या खासकर ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों में सामने आई है। बार-बार डिहाइड्रेशन, तेज गर्मी में काम करना, रसायनों के संपर्क में आना और पानी में भारी धातुओं की मौजूदगी इसके संभावित कारण माने जा रहे हैं। ऐसे इलाकों में नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।
दवाओं और सप्लीमेंट्स से भी सावधानी
बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दर्दनाशक दवाओं, विशेषकर NSAIDs, का सेवन किडनी को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। इसी तरह कुछ हर्बल या पारंपरिक उत्पादों में हानिकारक तत्व पाए गए हैं। बॉडीबिल्डिंग या वजन घटाने के लिए लिए जाने वाले सप्लीमेंट्स भी जोखिम बढ़ा सकते हैं, खासकर यदि किडनी पहले से कमजोर हो।
अन्य जोखिम कारक
- बार-बार होने वाला यूरिन इंफेक्शन
- किडनी स्टोन
- परिवार में किडनी रोग का इतिहास
- ऑटोइम्यून बीमारियां
- ये सभी कारक किडनी की बीमारी के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
समय पर जांच है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित ब्लड और यूरिन टेस्ट करवाना बेहद जरूरी है। शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, धूम्रपान से दूरी और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा या सप्लीमेंट न लेना किडनी को सुरक्षित रखने के महत्वपूर्ण कदम हैं।