चीन में विदेशियों और भारतीय छात्रों की जासूसी का बड़ा खुलासा, घर से लेकर अस्पताल तक... हर हरकत पर ड्रैगन की पैनी नजर

Edited By Updated: 03 Aug, 2026 01:15 AM

big revelation of spying on foreign and indian students in china

चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा अपने नागरिकों की निगरानी करने की खबरें तो अक्सर आती रहती हैं, लेकिन अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि चीन वहां रहने वाले विदेशियों, विशेषकर भारतीय छात्रों की भी पल-पल की जासूसी कर रहा है। एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता,...

बीजिंग: चीन की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा अपने नागरिकों की निगरानी करने की खबरें तो अक्सर आती रहती हैं, लेकिन अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि चीन वहां रहने वाले विदेशियों, विशेषकर भारतीय छात्रों की भी पल-पल की जासूसी कर रहा है। एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता मार्क होफर ने 'डायनेमिक कंट्रोल प्लेटफॉर्म फॉर ओवरसीज पर्सनेल' नामक एक वेबसाइट का पता लगाया है जिसमें विदेशियों की निजी जानकारी का कच्चा चिट्ठा मौजूद है।

भारतीय छात्र निशाने पर
इस जासूसी नेटवर्क का सबसे चिंताजनक पहलू भारतीय छात्रों से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, झांगजियाकौ स्थित हेबेई नॉर्थ यूनिवर्सिटी (Hebei North University) में पढ़ने वाले भारत और पाकिस्तान के छात्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है। इस डेटाबेस में छात्रों की न केवल बुनियादी जानकारी है बल्कि उनका धर्म, वैवाहिक स्थिति, वे क्या पढ़ रहे हैं और उनके कैंपस में प्रवेश करने का सटीक समय तक दर्ज किया गया है।

निजी जीवन में तांक-झांक
चीन का यह निगरानी तंत्र इतना गहरा है कि यह विदेशियों के घरों के भीतर तक पहुंच गया है। झांगजियाकौ शहर में सक्रिय यह सिस्टम लोगों के अस्पताल जाने, गैस बिल के भुगतान, फोन सिग्नल और यहां तक कि उनके विमान या ट्रेन की सीट संख्या तक का रिकॉर्ड रख रहा है। इस प्लेटफॉर्म में लगभग 12,000 प्रविष्टियां मिली हैं, जिनमें 700 से अधिक विदेशी निवासी और 300 विदेशी पत्रकार शामिल हैं।

सुरक्षा में बड़ी चूक
हैरानी की बात यह है कि यह संवेदनशील डेटाबेस बेहद असुरक्षित स्थिति में इंटरनेट पर उपलब्ध था जिसे कोई भी एक्सेस कर सकता था। इस सिस्टम को बीजिंग की एक कंपनी 'ओरिजिन डायनेमिक' से जुड़ा पाया गया है जो पुलिस विभागों को निगरानी उपकरण बेचती है। इस कंपनी में सरकारी अधिकारियों की भी हिस्सेदारी है।

देशों का वर्गीकरण
चीन ने इस जासूसी के लिए देशों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को "फाइव आइज अलायंस" (Five Eyes Alliance) के रूप में एक समूह में रखा गया है। वहीं, पाकिस्तान, ईरान और मिस्र जैसे देशों को "प्रमुख देशों" (Key Countries) की श्रेणी में डालकर उनकी निगरानी की जा रही है। इसके अलावा, कार्यकर्ताओं और संदिग्ध व्यक्तियों के लिए 'की पर्सन्स' (Key Persons) नाम से एक अलग फोल्डर बनाया गया है। हालांकि यह वेबसाइट अब इंटरनेट से हटा ली गई है, लेकिन इसने चीन में रह रहे विदेशियों की गोपनीयता और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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