ड्रैगन का समुद्र में शक्ति प्रदर्शन: चीन ने पनडुब्बी से दागी बैलिस्टिक मिसाइल, इंडो-पैसिफिक में बढ़ी टेंशन

Edited By Updated: 06 Jul, 2026 01:43 PM

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चीन ने दक्षिण प्रशांत महासागर में परमाणु संचालित पनडुब्बी से लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। मिसाइल में डमी वारहेड लगाया गया था। चीन ने परीक्षण की सूचना कुछ घंटे पहले न्यूजीलैंड को दी, लेकिन वेलिंगटन ने क्षेत्रीय...

International Desk:  चीन ने सोमवार को दक्षिण प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु संचालित पनडुब्बी से लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) का परीक्षण किया। यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, मिसाइल का प्रक्षेपण सोमवार दोपहर 12:01 बजे किया गया। मिसाइल में वास्तविक परमाणु हथियार की बजाय डमी (नकली) वारहेड लगाया गया था, जिसका उपयोग आमतौर पर परीक्षण के दौरान उड़ान और लक्ष्य क्षमता की जांच के लिए किया जाता है।


 
New Zealand सरकार ने पुष्टि की कि चीन ने इस परीक्षण की जानकारी उसे प्रक्षेपण से कुछ घंटे पहले दे दी थी।हालांकि, न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री Winston Peters ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चीन को पहले भी इस प्रकार की सैन्य गतिविधियों को लेकर क्षेत्रीय देशों की चिंताओं से अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सूचना देना सकारात्मक कदम है, लेकिन इतनी कम अवधि पहले जानकारी देना क्षेत्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ी चिंताओं को पूरी तरह दूर नहीं करता। पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें (Submarine-Launched Ballistic Missiles - SLBM) किसी भी परमाणु शक्ति की दूसरी जवाबी परमाणु क्षमता (Second-Strike Capability) का अहम हिस्सा मानी जाती हैं।

 

ऐसी मिसाइलें समुद्र में छिपी पनडुब्बियों से दागी जा सकती हैं, जिससे उनका पता लगाना और उन्हें रोकना बेहद कठिन होता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के परीक्षण चीन की समुद्री परमाणु क्षमता को मजबूत करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी सैन्य मौजूदगी का संकेत देते हैं। दक्षिण प्रशांत में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियां पहले से ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अन्य सहयोगी देशों के लिए चिंता का विषय रही हैं। ऐसे परीक्षणों पर इन देशों की नजर बनी रहती है क्योंकि इनका असर क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन और सामरिक प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है।
 

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