Edited By Pardeep,Updated: 23 May, 2026 09:50 PM

पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय खसरे (Measles) के भयानक प्रकोप की चपेट में है। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस जानलेवा बीमारी ने देश में अब तक 500 से ज्यादा बच्चों की जान ले ली है। यह पिछले कई दशकों में बांग्लादेश में...
ढाका: पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय खसरे (Measles) के भयानक प्रकोप की चपेट में है। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस जानलेवा बीमारी ने देश में अब तक 500 से ज्यादा बच्चों की जान ले ली है। यह पिछले कई दशकों में बांग्लादेश में खसरे का सबसे भीषण प्रकोप माना जा रहा है।
अस्पतालों में मची अफरा-तफरी, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं
रिपोर्ट के मुताबिक, खसरे के मामले पिछले कुछ महीनों में इतनी तेजी से फैले हैं कि वहां के अस्पतालों में अब जगह कम पड़ने लगी है। खासकर ग्रामीण इलाकों और घनी आबादी वाली कम आय वाली बस्तियों में स्वास्थ्य सेवाएं इस बोझ के तले पूरी तरह चरमरा गई हैं। स्वास्थ्य निदेशालय के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च से 23 मई के बीच देशभर में 62,507 संदिग्ध मामले और 8,494 प्रयोगशाला-पुष्टि (Confirmed) मामले दर्ज किए गए हैं।
5 साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा निशाने पर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा 5 साल से कम उम्र के बच्चों को है। विशेष रूप से वे बच्चे जिन्होंने अभी तक टीका नहीं लगवाया है या जिनका टीकाकरण अधूरा है, वे मौत के मुंह में समा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पिछले महीने ही आगाह किया था कि नियमित टीकाकरण कवरेज में गिरावट के कारण बड़े पैमाने पर प्रकोप का खतरा बढ़ गया है।
सरकार ने छेड़ी 'जंग', विटामिन-A का भी सहारा
हालात को बेकाबू होते देख बांग्लादेश सरकार ने आपातकालीन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं:
- टीकाकरण अभियान: प्रभावित क्षेत्रों में खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया गया है।
- विटामिन-A वितरण: जटिलताओं को कम करने के लिए बच्चों को विटामिन-A की खुराक दी जा रही है।
- रैपिड रिस्पॉन्स टीमें: सरकार ने त्वरित कार्रवाई के लिए टीमों को तैनात किया है और निगरानी सख्त कर दी है।
दो बूंद जिंदगी की ही है एकमात्र बचाव
खसरा दुनिया की सबसे संक्रामक बीमारियों में से एक है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन की दो खुराक के जरिए इससे पूरी तरह बचा जा सकता है। वर्तमान संकट ने टीकाकरण की महत्ता को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है।