खामेनेई के अंतिम संस्कार में पहुंचा था रहस्यमयी नकाबपोश, पहचान का खुला राज तो दुनिया हैरान, जानें कौन है 'मास्क मैन'?

Edited By Updated: 13 Jul, 2026 05:45 PM

mystery of masked man at ali khamenei s funeral finally solved

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे रहस्यमयी नकाबपोश व्यक्ति की पहचान को लेकर नया दावा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार वह उनके बड़े पोते मोहम्मद जवाद खामेनेई हैं, जिन्होंने कथित तौर पर अमेरिकी-इजरायली हमलों में चेहरे...

International Desk: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में पहली पंक्ति में बैठे एक रहस्यमयी नकाबपोश व्यक्ति को लेकर कई महीनों से अटकलें लगाई जा रही थीं। अब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस शख्स की पहचान सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम संस्कार में काले मास्क और काली बेसबॉल कैप में नजर आया व्यक्ति मोहम्मद जवाद खामेनेई है, जो अली खामेनेई के सबसे बड़े पोते बताए जा रहे हैं। वह खामेनेई के बड़े बेटे मुस्तफा खामेनेई के पुत्र हैं।

 

पहले समझा गया मोजतबा खामेनेई 
अंतिम संस्कार के दौरान सोशल मीडिया पर यह अटकलें तेज हो गई थीं कि मास्क पहनने वाला व्यक्ति मोजतबा खामेनेई है, जिन्हें लंबे समय से अली खामेनेई का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है। हालांकि, नई रिपोर्ट में इस दावे को खारिज करते हुए कहा गया कि वह व्यक्ति मोजतबा नहीं, बल्कि मोहम्मद जवाद थे।

 

चेहरे पर गंभीर चोट के कारण पहना मास्क
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के दौरान मोहम्मद जवाद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके चेहरे पर गंभीर जलन और अन्य चोटें आई थीं। इसी वजह से उन्होंने अंतिम संस्कार के दौरान अपना चेहरा काले मास्क से ढक रखा था। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली हमलों के समय मोजतबा खामेनेई भी उसी परिसर में मौजूद थे, लेकिन अलग कमरे में होने के कारण उनकी जान बच गई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि उनके हाथ, पैर और बांह में चोटें आई थीं और उनका इलाज किया गया। हमलों के बाद से उन्होंने कोई सार्वजनिक कार्यक्रम या भाषण नहीं दिया है।

 

चार महीने बाद हुआ अंतिम संस्कार
अली खामेनेई का अंतिम संस्कार उनकी मौत के लगभग चार महीने बाद किया गया। ईरानी अधिकारियों का कहना था कि अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव और सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक अंतिम संस्कार तत्काल कराना संभव नहीं था। बाद में मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि शोक कार्यक्रमों में करोड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।
 
 

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