Edited By Tanuja,Updated: 21 Jun, 2026 06:10 PM

स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच आधिकारिक वार्ता शुरू हो गई है। कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। बातचीत का मुख्य उद्देश्य हालिया 14-सूत्रीय समझौते को लागू करना, परमाणु विवाद सुलझाना, क्षेत्रीय तनाव कम करना और...
International Desk:अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित आधिकारिक वार्ता रविवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में शुरू हो गई। इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। वार्ता ऐसे समय शुरू हुई है जब मध्य पूर्व में तनाव कम करने, परमाणु विवाद का समाधान खोजने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने के प्रयास तेज हुए हैं। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य फोकस हाल ही में हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन और आगे की कार्ययोजना पर रहेगा।
दुनिया भर के ऊर्जा और वित्तीय बाजार इस बैठक पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। Strait of Hormuz वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है और इससे जुड़ा कोई भी फैसला अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिरता मिल सकती है। यह वार्ता केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। इसलिए दुनिया भर की निगाहें बर्गेनस्टॉक में हो रही इस बातचीत पर टिकी हुई हैं।
इससे कुछ घंटे पहले स्विस विदेश मंत्रीइग्नाजियो कैसिस और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में द्विपक्षीय बैठक हुई। कैसिस ने सोशल मीडिया पर बैठक की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्विट्जरलैंड और ईरान के बीच विश्वास का संबंध कायम है और यह मध्य पूर्व में शांति एवं सुरक्षा के लिए कूटनीति की सेवा में लगा हुआ है। बर्गेनस्टॉक में रविवार को अमेरिका और ईरान दोनों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुंच गए। यह वार्ता 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत हो रही है। इस समझौते में 60 दिनों के भीतर प्रमुख विवादों के समाधान और पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है।अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। उनके साथ अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी मौजूद हैं।
अमेरिकी दल ने औपचारिक वार्ता से पहले पाकिस्तानी मध्यस्थ दल के साथ प्रारंभिक बैठक की। इस दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी उपस्थित रहे। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर को समझौते के प्रमुख गारंटर और मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देश अमेरिका और ईरान के बीच विश्वास बहाली और समझौते के क्रियान्वयन में मदद कर रहे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान का प्रतिनिधिमंडल आर्थिक और कूटनीतिक विशेषज्ञों से लैस है। इसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अलावा ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़, केंद्रीय बैंक और तेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।
वार्ता के समानांतर सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर बनी हुई है। ईरान का दावा है कि लेबनान में हालिया इजरायली हमले के बाद उसने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को फिर से बंद कर दिया है। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि जलमार्ग खुला हुआ है और जहाजों की आवाजाही जारी है। गौरतलब है कि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है। इसलिए होर्मुज की स्थिति का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। ये वार्ताएं केवल अमेरिका और ईरान के रिश्तों तक सीमित नहीं हैं। इनका असर पूरे मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। यदि समझौते के क्रियान्वयन पर सहमति बनती है तो यह क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।