Edited By Tanuja,Updated: 04 Jun, 2026 07:08 PM

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार 18 वर्षीय घरेलू सहायिका की गर्भपात संबंधी जटिलताओं के कारण मौत हो गई। पीड़िता ने मरने से पहले अपने नियोक्ता के बेटे और ड्राइवर पर कई बार दुष्कर्म का आरोप लगाया था। मामले में हत्या की धाराएं भी...
Islamabad: पाकिस्तान के Punjab प्रांत में एक 18 वर्षीय युवती की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, युवती कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म की शिकार थी और गर्भपात से जुड़ी गंभीर चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण सरकारी अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता एक घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थी। उसने अपने बयान और प्राथमिकी (FIR) में आरोप लगाया था कि उसके नियोक्ता के विवाहित बेटे और ड्राइवर ने कई महीनों तक उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। आरोप है कि नियोक्ता ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पूरे मामले को छिपाने की कोशिश की।
पीड़िता ने बताया था कि गर्भपात संबंधी दवाओं से उत्पन्न जटिलताओं के बाद उसे Raiwind के एक क्लिनिक ले जाया गया था। वहां डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में चार से पांच महीने के भ्रूण की मृत्यु हो चुकी थी और मामला अत्यंत गंभीर था। कुछ समय आराम के लिए उसे उसके घर Faisalabad भेज दिया गया, लेकिन उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। बाद में 23 मई को उसे Lahore के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता के शुरुआती बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया था। इसमें नियोक्ता के बेटे, ड्राइवर और नियोक्ता को नामजद किया गया।
अब युवती की मौत के बाद मामले में हत्या की धाराएं भी जोड़ दी गई हैं। पुलिस ने ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर पहले से चिंता जताई जा रही है। मार्च में भी पंजाब प्रांत में एक 19 वर्षीय महिला के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया था कि चार लोगों ने उसे एक वैन में बंधक बनाकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर दुष्कर्म किया और धमकी दी। महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामले पाकिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा, न्याय तक पहुंच और यौन हिंसा के पीड़ितों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। वे दोषियों के खिलाफ त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।