Edited By Pardeep,Updated: 08 Jul, 2026 10:19 PM

कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो और इरादे नेक हों, तो कोई भी लक्ष्य हासिल करना नामुमकिन नहीं है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है तेलंगाना के नलगोंडा जिले के एक शख्स ने, जिसकी कहानी अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।
नलगोंडा : कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो और इरादे नेक हों, तो कोई भी लक्ष्य हासिल करना नामुमकिन नहीं है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है तेलंगाना के नलगोंडा जिले के एक शख्स ने, जिसकी कहानी अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।
4 साल की मेहनत और सिक्कों का ढेर
नलगोंडा जिले के चिट्याला मंडल स्थित वेलिमिनेडु गांव के रहने वाले कोंडे रघुपति ने अपनी छोटी-छोटी बचत से सबको हैरान कर दिया है। रघुपति पिछले 4 से 5 वर्षों से लगातार 10-10 रुपये के सिक्के जमा कर रहे थे। उनका सपना था कि वे बिना किसी कर्ज या ईएमआई (EMI) के अपनी मेहनत की कमाई से एक नई मोटरसाइकिल खरीदें।
जब शोरूम में पहुंचे सिक्कों से भरे बैग
हाल ही में जब रघुपति की पुरानी बाइक ने काम करना बंद कर दिया, तो उन्होंने अपना सपना सच करने का फैसला किया। वे सीधे 'श्री विनायक मोटर्स' के शोरूम पहुंचे, लेकिन उनके हाथ में कोई चेक या नोटों की गड्डी नहीं बल्कि सिक्कों से भरे भारी-भरकम बैग थे। शोरूम के कर्मचारी उस वक्त दंग रह गए जब उन्हें पता चला कि बाइक की पूरी कीमत ₹1.10 लाख सिर्फ 10 रुपये के सिक्कों में चुकाई जानी है।
2 घंटे तक चलती रही सिक्कों की गिनती
भारतीय मुद्रा होने के कारण शोरूम प्रबंधन ने भुगतान स्वीकार करने का फैसला किया। इसके बाद शोरूम के कर्मचारी एक साथ बैठकर सिक्के गिनने लगे। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जब गिनती पूरी हुई, तो कुल राशि ₹1,10,000 निकली।, इसके तुरंत बाद रघुपति को उनकी पसंदीदा नई 'स्प्लेंडर प्लस' बाइक की चाबियां सौंप दी गईं।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
इस अनोखे नजारे को देखने के लिए शोरूम में भारी भीड़ जमा हो गई। लोगों ने इस पल को अपने कैमरों में कैद किया, जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग रघुपति की बचत करने की आदत और कर्ज मुक्त रहने के उनके फैसले की जमकर सराहना कर रहे हैं।
बिना लोन और EMI के मिली खुशी
अपनी इस उपलब्धि पर रघुपति बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बात का सबसे अधिक गर्व है कि उन्होंने किसी बैंक से लोन नहीं लिया। यह घटना समाज को एक बड़ा संदेश देती है कि नियमित रूप से की गई छोटी बचत समय के साथ एक बड़ी पूंजी का रूप ले सकती है।