60 हजार प्रवासियों की घुसपैठ बाद स्पेन का सख्त कदम; समुद्र में बना दी लंबी दीवार, 67 लोगों की मौत से मचा हड़कंप

Edited By Updated: 02 Aug, 2026 07:00 PM

spain installs 500 metre long sea barrier after 60 000 migrants enter ceutaat

मोरक्को से करीब 60 हजार प्रवासियों की अचानक घुसपैठ के बाद स्पेन ने सेउटा की समुद्री सीमा पर 500 मीटर लंबी बैरियर लगा दी है। इस संकट में 67 लोगों की मौत हुई। यूरोप में अवैध प्रवास पर नई बहस छिड़ गई है और कई देशों ने सीमा सुरक्षा कड़ी करने की मांग की...

International Desk: उत्तरी अफ्रीका में स्थित अपने स्वायत्त क्षेत्र सेउटा (Ceuta) में पिछले सप्ताह करीब 50,000 से 60,000 प्रवासियों की भारी घुसपैठ के बाद स्पेन ने बड़ा सुरक्षा कदम उठाया है। सरकार ने मोरक्को से लगी समुद्री सीमा पर 500 मीटर लंबी (1,600 फीट) समुद्री बैरियर स्थापित कर दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की अवैध घुसपैठ को रोका जा सके। स्पेन सरकार के अनुसार इस भीषण सीमा संकट में कम से कम 67 प्रवासियों की मौत हो गई। इनमें कई लोग समुद्र पार करते समय डूब गए, जबकि कई लोग ब्रेकवॉटर (समुद्री सुरक्षा बांध) पार करने की कोशिश के दौरान भगदड़ में कुचल गए। इस घटना ने पूरे यूरोप को झकझोर दिया और इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा प्रवासी संकट माना जा रहा है।


 स्पेनिश अधिकारियों के अनुसार गुरुवार और शुक्रवार के बीच लगभग 60 हजार लोग समुद्र और जमीन के रास्ते से सेउटा में घुस आए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि स्पेन को सेना तैनात करनी पड़ी , अतिरिक्त पुलिस बल भेजना पड़ा और सीमा पर सुरक्षा कई गुना बढ़ानी पड़ी। हालांकि बाद में अधिकांश प्रवासी वापस मोरक्को लौट गए।शनिवार को कुछ प्रवासी समुद्र तैरकर सेउटा पहुंचे, लेकिन वहां पहले से तैनात सैनिकों ने उन्हें तुरंत पकड़कर वापस सीमा की ओर भेज दिया। स्पेन के गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का ने कहा, "जो लोग कानून तोड़ेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।"सेउटा संकट के बाद यूरोपीय देशों में अवैध प्रवास को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। इटली, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, ग्रीस समेत 22 यूरोपीय देशों ने यूरोपीय संघ से इस मुद्दे पर तत्काल बैठक बुलाने और संयुक्त रणनीति बनाने की मांग की है।  

 

कुछ देशों ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी घटनाएं जारी रहीं तो पूरे यूरोप की सीमा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने कुछ यूरोपीय नेताओं की आलोचना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रवासियों के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। यूरोप की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा पूरे यूरोपीय संघ की सामूहिक जिम्मेदारी है।  स्पेन और मोरक्को के सहयोग से स्थिति पर 24 घंटे के भीतर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया। हालांकि सीमा पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद कई सवाल उठे, लेकिन स्पेन के गृह मंत्री ने कहा कि "मोरक्को स्पेन के लिए खतरा नहीं, बल्कि भरोसेमंद साझेदार है। दोनों देशों के सहयोग से स्थिति सामान्य हुई।"
 

वापस लौट रहे कई प्रवासियों ने दावा किया कि उन्हें कई दिनों तक खाना नहीं मिला। जंगलों में रात बितानी पड़ी। भोजन के लिए झगड़े तक हुए और कई लोग घायल अवस्था में मोरक्को लौटे। इसके बावजूद कुछ प्रवासियों ने कहा कि वे हर हाल में यूरोप में रहने की कोशिश जारी रखेंगे। इस घटना का भारत पर प्रत्यक्ष असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसके कई अप्रत्यक्ष प्रभाव हो सकते हैं । यूरोप में अवैध प्रवास पर और सख्त नीतियां लागू हो सकती हैं। वीजा और सीमा सुरक्षा नियम और कठोर हो सकते हैं। भारत सहित अन्य देशों के वैध यात्रियों की सुरक्षा जांच बढ़ सकती है। 

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