Edited By Tanuja,Updated: 14 Oct, 2026 02:48 PM

थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल की करीब 60 डॉलर की कैसियो घड़ी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय है। प्रधानमंत्री इस पर अपना नाम खुदवाकर मंत्रियों और सहयोगियों को भेंट करते हैं। इसे ‘कैसियो कनेक्शन’ कहा जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यह...
Bangkok: थाईलैंड की राजनीति में अब करोड़ों रुपए की महंगी घड़ियों के बजाय महज 60 डॉलर यानी करीब 5,000 रुपये की कैसियो घड़ी चर्चा का विषय बन गई है। दरअसल, थाईलैंड की राजनीति में महंगी घड़ियां लंबे समय से रुतबे और हैसियत का प्रतीक रही हैं, लेकिन अब प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल की ओर से दिया जा रहा एक सस्ता तोहफा सुर्खियों में है। करीब 60 डॉलर की कैसियो घड़ी मंत्रियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनीतिक सहयोगियों के बीच खास पहचान बन गई है। यह घड़ी कैसियो का मॉडल AE1200WH है, जिसे उसके खास नक्शे वाले डिजिटल प्रदर्शन और पुराने जमाने जैसी आधुनिक बनावट के कारण ‘कैसियो रॉयल’ भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री इस पर अपना नाम खुदवाकर लोगों को भेंट करते हैं। घड़ी पाने वाले कई लोग इसे नियमित रूप से पहन रहे हैं। इसी चलन को राजनीतिक हलकों में ‘कैसियो कनेक्शन’ कहा जाने लगा है।
प्रधानमंत्री का तोहफा रिश्तों की खास पहचान
थाईलैंड के उप परिवहन मंत्री सिरिपोंग अंगकासाकुलकियात को भी प्रधानमंत्री से यह घड़ी मिली है। उन्होंने बताया कि हाल ही में मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उन्हें यह तोहफा दिया गया था। इसके बाद से वह इसे लगभग रोज पहन रहे हैं। सिरिपोंग के मुताबिक, किसी वस्तु का महत्व केवल उसकी कीमत से तय नहीं होता, बल्कि यह भी मायने रखता है कि उसे किसने दिया है। उन्होंने मजाक में कहा कि अब उन्होंने हजारों डॉलर की महंगी घड़ियां पहनना लगभग छोड़ दिया है।
सिरिपोंग के अनुसार, प्रधानमंत्री बैंकॉक में अपनी यात्राओं और विभिन्न स्थानों के दौरे के दौरान छोटी दुकानों और बाजारों से ये घड़ियां खरीदते हैं। इसके बाद उन पर अपना नाम खुदवाकर सहयोगियों को भेंट करते हैं। घड़ी पाने वालों के बीच अब इस बात की भी चर्चा होने लगी है कि किसे धातु की पट्टी वाली घड़ी मिली और किसे रेजिन की पट्टी वाली।
सस्ती घड़ी के बड़े राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह चलन केवल फैशन तक सीमित नहीं है। किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मिला साधारण-सा उपहार भी उसके साथ निकटता और विशेष संबंधों का संकेत बन सकता है। सिंगापुर स्थित आईएसईएएस-यूसुफ इशाक संस्थान के अतिथि शोधार्थी नापोन जटुस्रिपितक का मानना है कि प्रधानमंत्री से मिला ऐसा उपहार पाने वाले व्यक्ति में एहसान चुकाने की भावना पैदा कर सकता है। इससे प्रधानमंत्री के प्रति निष्ठा बढ़ने और राजनीतिक समर्थन मजबूत होने की संभावना रहती है। हालांकि, थाई सरकार के प्रवक्ता एक्कापोप पियानपिसेस ने इस धारणा को खारिज किया है कि घड़ियां किसी विशेष राजनीतिक गुट की पहचान हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री को यह घड़ी उपयोगी लगती है और वह इसे दूसरों के साथ साझा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसका कोई राजनीतिक संकेत नहीं है।
थाई राजनीति में महंगी घड़ियों का पुराना विवाद
थाईलैंड में घड़ियों को लेकर राजनीतिक विवाद पहले भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2017 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री प्रवित वोंगसुवान की महंगी घड़ियों को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। तस्वीरों में उन्हें अलग-अलग महंगी घड़ियां पहने देखा गया था, जिसके बाद भ्रष्टाचार-रोधी जांच शुरू हुई। जांचकर्ताओं ने 10 लाख डॉलर से अधिक कीमत वाली 22 घड़ियों की पड़ताल की। प्रवित ने कहा था कि उन्होंने ये घड़ियां अपने एक धनी मित्र से उधार ली थीं, जिनकी बाद में मृत्यु हो गई। अगले वर्ष उन्हें इस मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया गया ।
प्रधानमंत्री अनुतिन ने भी अपनी संपत्ति घोषणा में 60 करोड़ नहीं, बल्कि 6 करोड़ थाई बाट से अधिक मूल्य की 22 लग्जरी घड़ियों का उल्लेख किया था। हाल ही में उन्हें प्रभावशाली नेता न्यूइन चिदचोब के जन्मदिन समारोह में रोलेक्स डे-डेट 40 पहने देखा गया। न्यूइन के पास रिचर्ड मिले की महंगी घड़ी थी। ऐसे में प्रधानमंत्री की ओर से दी जा रही सस्ती कैसियो घड़ी ने अलग तरह से ध्यान खींचा है। इसकी कीमत भले ही कम हो, लेकिन इसे प्रधानमंत्री का निजी तोहफा होने के कारण राजनीतिक महत्व मिल रहा है।
गठबंधन के संकेत?
इस चलन पर चर्चा तब और तेज हो गई, जब प्रभावशाली नेता थामनत प्रोम्पोव को भी प्रधानमंत्री के नाम वाली कैसियो घड़ी पहने देखा गया। उनकी क्ला थाम पार्टी संभावित रूप से अनुतिन के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पार्टी के महासचिव की ओर से यह संकेत दिए जाने के बाद कि घड़ी सीधे प्रधानमंत्री की कलाई से उतारकर दी गई थी, राजनीतिक हलकों में संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गईं। नापोन के अनुसार, ऐसी घड़ियां प्रधानमंत्री के लिए मित्रों, समर्थकों और राजनीतिक गुटों का नेटवर्क मजबूत करने का जरिया बन सकती हैं।