नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच तिब्बत में सूचना पर पहरा, स्थानीय वीडियो सोशल मीडिया से हटाए गए

Edited By Updated: 28 Aug, 2026 02:15 PM

tibet tightens information control amid nepal flood devastation local re

नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। कई गांवों के बह जाने के बाद पत्रकार जहां चश्मदीदों के बयान और ताजा जानकारी जुटा रहे थे, वहीं सीमा पार चीन के तिब्बत में हालात की तस्वीर काफी अलग नजर आई। यहां स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए बाढ़ और...

काठमांडू/बीजिंग: नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। कई गांवों के बह जाने के बाद पत्रकार जहां चश्मदीदों के बयान और ताजा जानकारी जुटा रहे थे, वहीं सीमा पार चीन के तिब्बत में हालात की तस्वीर काफी अलग नजर आई। यहां स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए बाढ़ और भूस्खलन से जुड़े कई वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाए जाने की बात सामने आई है।

भूस्खलन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल 
तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में एक बॉर्डर क्रॉसिंग पर भूस्खलन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्यिरोंग में 500 से अधिक लोग लापता बताए गए हैं, जबकि करीब 2,000 लोगों की आबादी वाले इस क्षेत्र में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। हालांकि, अधिकारियों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ग्रामीण इलाकों में कौन-कौन से गांव और बस्तियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।

सरकारी मीडिया तक सीमित रही जानकारी
तिब्बत में आपदा से जुड़ी जानकारी मुख्य रूप से चीन के सरकारी नियंत्रण वाले मीडिया के जरिए सामने आई। इन रिपोर्टों में राहत और बचाव अभियान पर ज्यादा जोर दिया गया है। बताया गया है कि सरकार ने इलाके में चीनी सेना और आपातकालीन कर्मचारियों को तैनात किया है। बचाव कार्यों के लिए ड्रोन और हेलीकॉप्टर भी लगाए गए हैं। चीन के सरकारी अखबार पीपल्स डेली ने भी ग्यिरोंग में प्रभावित लोगों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास करने के संबंध में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देशों को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

तिब्बत में सूचना नियंत्रण पर फिर सवाल
चीन में सेंसरशिप और सूचना पर सरकारी नियंत्रण लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है, लेकिन तिब्बत में यह नियंत्रण और अधिक सख्त होने का आरोप लगाया जाता है। तिब्बत 1950 के दशक से चीन के नियंत्रण में है और यहां अधिक स्वायत्तता की मांग को लेकर समय-समय पर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

 विदेशी पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से जाने की अनुमति
रिपोर्टों के मुताबिक, विदेशी पत्रकारों को आम तौर पर सरकारी दौरों के अलावा तिब्बत में स्वतंत्र रूप से जाने की अनुमति नहीं है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय तिब्बतियों को पत्रकारों से बात करने या सरकार के आधिकारिक रुख से अलग जानकारी ऑनलाइन साझा करने पर हिरासत या गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है।

आपदा में सूचना की कमी से बढ़ सकती है मुश्किल
इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत के कार्यकारी निदेशक रयान फियोरेसी के अनुसार, सूचना पर नियंत्रण का मतलब है कि आपदा के दौरान भी जानकारी का प्रवाह मुख्य रूप से चीनी सरकार के हाथ में रहता है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि स्थानीय लोग नुकसान और फंसे हुए लोगों की जानकारी साझा करने से डरते हैं या उनकी पोस्ट हटा दी जाती हैं, तो जरूरी सूचनाएं प्रभावित परिवारों, राहतकर्मियों और आम लोगों तक समय पर नहीं पहुंच पाएंगी। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ राहत और बचाव अभियान नहीं, बल्कि आपदा प्रभावित इलाकों से स्वतंत्र और समय पर जानकारी सामने आना भी बन जाती है।

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