ट्रंप का बड़ा दांव: ग्रीनलैंड डील से अमेरिका को मिलेंगे नए बेस बनाने और उड़ान भरने के अधिकार

Edited By Updated: 19 Sep, 2026 09:15 AM

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डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी एक्सेस, बेस बनाने और ऊपर से उड़ान भरने (ओवरफ़्लाइट) के अधिकार मिलेंगे। इससे वॉशिंगटन को अतिरिक्त मिलिट्री ठिकाने बनाने की इजाज़त...

वॉशिंगटन: डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी एक्सेस, बेस बनाने और ऊपर से उड़ान भरने (ओवरफ़्लाइट) के अधिकार मिलेंगे। इससे वॉशिंगटन को अतिरिक्त मिलिट्री ठिकाने बनाने की इजाज़त मिलेगी और अगर ग्रीनलैंड भविष्य में आज़ाद भी हो जाता है, तब भी यह समझौता लागू रहेगा।

फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इस समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी मिलिट्री अधिकार मिलेंगे, साथ ही चीन, रूस और अन्य गैर-NATO देशों को द्वीप पर मिलिट्री बेस बनाने या सैनिक तैनात करने से रोका जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता विरोधियों को संवेदनशील क्षेत्रों - जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य क्षेत्रों - में निवेश करने से भी रोकेगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फॉक्स न्यूज़ से कहा, "यह ऐतिहासिक समझौता अमेरिका और अमेरिकी लोगों के लिए एक बड़ी जीत है।" रुबियो ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप की दूरदर्शिता और नेतृत्व की बदौलत, यह ऐतिहासिक समझौता अमेरिकी टैक्सपेयर पर बिना किसी खर्च के आर्कटिक में अमेरिकी सुरक्षा हितों की स्थायी गारंटी देता है।" वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इस समझौते की कोई समय-सीमा (एक्सपायरी डेट) नहीं है और इसे इस तरह बनाया गया है कि अगर ग्रीनलैंड भविष्य में आज़ाद भी हो जाए, तब भी यह लागू रहे। फॉक्स न्यूज़ के अनुसार, इस समझौते से ग्रीनलैंड पर अमेरिका का अधिकार (संप्रभुता) नहीं मिलेगा।

अधिकारी ने कहा, "यहां फ़र्क यह है कि हम अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ाने के अधिकार के लिए कोई पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं।" रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते से अमेरिका को ज़रूरत पड़ने पर और सैन्य ठिकाने बनाने की इजाज़त भी मिलेगी; इसके लिए डेनमार्क और ग्रीनलैंड से सलाह तो ली जाएगी, लेकिन ऐसे ठिकानों को मंज़ूरी देने का अधिकार उनके पास नहीं होगा। यह घटनाक्रम ट्रंप के उस 'ट्रुथ सोशल' पर किए गए ऐलान के बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक "इनफ़िनिट लाइफ़" (हमेशा चलने वाला) समझौता किया है।

ट्रंप ने कहा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने डेनमार्क साम्राज्य और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है, जिससे अमेरिका को ग्रीनलैंड में सुरक्षा और अन्य सभी ज़रूरतों पर स्थायी नियंत्रण मिल जाएगा।" ट्रंप ने कहा कि यह समझौता अमेरिका के दुश्मनों को वाशिंगटन की मंज़ूरी के बिना ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाने बनाने, सेना रखने या संवेदनशील निवेश करने से रोकेगा। ट्रंप ने कहा, "यह एक 'इनफ़िनिट लाइफ़' समझौता है, इसका कोई अंत नहीं है!" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका द्वीप पर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का काम शुरू करेगा।

ग्रीनलैंड में पहले से ही अमेरिकी पिटुफ़िक स्पेस बेस मौजूद है और वाशिंगटन 1951 के रक्षा समझौते के तहत द्वीप तक सैन्य पहुँच बनाए हुए है। फॉक्स न्यूज़ के अनुसार, नई व्यवस्था से मौजूदा अधिकारों का काफ़ी विस्तार होगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और यूरोप का ध्यान आर्कटिक सुरक्षा और रूस व चीन के साथ प्रतिस्पर्धा पर ज़्यादा है। फॉक्स न्यूज़ ने बताया कि अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच बातचीत फरवरी में शुरू हुई थी और कई दौर की गोपनीय चर्चाओं तक चली।

डेनमार्क ने कहा है कि डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच होने वाला संभावित समझौता आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक में सुरक्षा को मज़बूत करेगा, साथ ही डेनमार्क साम्राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता तथा ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को भी मान्यता देगा। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने कहा कि संभावित समझौता आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक में साझा सुरक्षा को मज़बूत करेगा और नाटो (NATO) व यूरोप के लिए फ़ायदेमंद होगा।  

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