Edited By Pardeep,Updated: 20 Aug, 2026 10:02 PM

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए एक बेहद अनोखी और व्यावहारिक पहल की है। राज्य के 60,000 से अधिक स्कूलों में अब स्वयं के 'किचन गार्डन' (रसोई उद्यान) विकसित किए गए हैं, जहां उगने वाली ताजी सब्जियां सीधे बच्चों के...
नेशनल डेस्कः उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए एक बेहद अनोखी और व्यावहारिक पहल की है। राज्य के 60,000 से अधिक स्कूलों में अब स्वयं के 'किचन गार्डन' (रसोई उद्यान) विकसित किए गए हैं, जहां उगने वाली ताजी सब्जियां सीधे बच्चों के मिड-डे मील (दोपहर के भोजन) में इस्तेमाल की जा रही हैं।
इस नीति के जरिए सरकार ने लंबी सप्लाई चेन और बिचौलियों (middlemen) की भूमिका को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो रहा है कि बच्चों को बिना किसी देरी के मौसमी और बिल्कुल ताजी सब्जियां खाने को मिल रही हैं।
पाठ्यक्रम का हिस्सा बनी बागवानी, बच्चे खुद उगा रहे अपनी थाली का भोजन
इस योजना की एक और बड़ी विशेषता यह है कि लगभग 5,500 से अधिक स्कूलों में बच्चों को उनके पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में बागवानी और कृषि का व्यावहारिक ज्ञान दिया जा रहा है। स्कूली बच्चे खुद खेतों में काम करना और पौधे लगाना सीख रहे हैं, जिससे वे उसी भोजन को खा रहे हैं जिसे उगाने में उन्होंने खुद मदद की है।
बजट नहीं, लॉजिस्टिक्स की समस्या को किया हल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम ने इस बात को गहराई से समझा कि बच्चों को बेहतर पोषण न मिल पाना कोई बजट की समस्या नहीं, बल्कि खराब वितरण प्रणाली (लॉजिस्टिक्स) की समस्या थी। इस किचन गार्डन मॉडल ने बिना किसी बड़े अतिरिक्त बजट के वितरण की समस्या को सीधे तौर पर हल कर दिया है।
यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी स्कूली पोषण और व्यावहारिक शिक्षा का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है।