Edited By Tanuja,Updated: 20 Aug, 2026 05:02 PM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आर्थिक तौर पर अलग-थलग करने के लिए बड़े अभियान का ऐलान किया है। उन्होंने तेल तस्करी, बैंकिंग, कंपनियों और वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई की चेतावनी दी। साथ ही ईरान की मदद करने वाले देशों को भी परिणाम भुगतने की...
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सैन्य कार्रवाई से आगे बढ़कर आर्थिक मोर्चे पर भी तेज होता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर आर्थिक कार्रवाई का ऐलान करते हुए कहा है कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया है। अब अमेरिका उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग करने की कोशिश करेगा। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि जो देश, बैंक या कंपनियां ईरान की मदद करेंगी, उन्हें भी अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उनकी योजना में ईरान के तेल कारोबार, वित्तीय लेनदेन और कथित तेल तस्करी नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना शामिल है। ट्रंप ने अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया है। इसका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर इतना दबाव बनाना है कि उसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करना और पैसे का लेनदेन करना मुश्किल हो जाए।
अमेरिका की कार्रवाई में कथित तौर पर बैंकों, कंपनियों, एयरपोर्ट, सरकारी संस्थाओं और वित्तीय नेटवर्क पर प्रतिबंध या अन्य आर्थिक कदम शामिल हो सकते हैं।ट्रंप ने दूसरे देशों से भी ईरान के साथ आर्थिक सहयोग कम करने और अमेरिकी अभियान में साथ देने की अपील की है। ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए तेल निर्यात बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में अमेरिकी कार्रवाई का सबसे बड़ा असर उसके तेल कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर पड़ सकता है। अमेरिका उन नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना चाहता है जिनके जरिए ईरानी तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है और फिर उसकी कमाई ईरान तक पहुंचती है। इसके तहत तेल से जुड़े जहाजों, कंपनियों, बिचौलियों और वित्तीय संस्थाओं को निशाना बनाया जा सकता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान के तेल कारोबार में अलग-अलग बिचौलियों और कंपनियों का इस्तेमाल होने के आरोप लगते रहे हैं। तेल की बिक्री के बाद रकम को ईरान तक पहुंचाना भी इस पूरी व्यवस्था का अहम हिस्सा होता है। अमेरिका अब केवल तेल बेचने वालों पर ही नहीं, बल्कि तेल की सप्लाई, शिपिंग और भुगतान से जुड़े पूरे नेटवर्क पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद ईरान के लिए तेल बेचना और उससे मिलने वाली रकम को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था के जरिए इस्तेमाल करना कठिन बनाना है। ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है और उसके कई सैन्य ठिकाने और कारखाने प्रभावित हुए हैं। उन्होंने ईरान की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए उसकी मुद्रा और अर्थव्यवस्था पर भी दबाव होने का दावा किया।
अमेरिकी दबाव के बीच ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नकदी ने ट्रंप के बयानों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति की बातों से ज्यादा किसी टैक्सी ड्राइवर की बात पर भरोसा है। उन्होंने ट्रंप की सोच को बचकाना बताया और दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बदलते बयानों से अमेरिका की वैश्विक छवि प्रभावित हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी आर्थिक कार्रवाई को नाकाम बताया और कहा कि प्रतिबंध ईरान पर प्रभाव नहीं डाल पाएंगे।