Edited By Rohini Oberoi,Updated: 21 Aug, 2026 12:35 PM
महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, सेवा और नैतिक जिम्मेदारी पर हाथ से लिखे 688 विचारों के एक दुर्लभ संग्रह ने इतिहास रच दिया है। 'सैफ्रनआर्ट' द्वारा आयोजित नीलामी में यह ऐतिहासिक पांडुलिपि रिकॉर्ड 16.20 करोड़ रुपये में बिकी है। किसी भी भारतीय ऐतिहासिक...
नई दिल्ली : महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, सेवा और नैतिक जिम्मेदारी पर हाथ से लिखे 688 विचारों के एक दुर्लभ संग्रह ने इतिहास रच दिया है। 'सैफ्रनआर्ट' द्वारा आयोजित नीलामी में यह ऐतिहासिक पांडुलिपि रिकॉर्ड 16.20 करोड़ रुपये में बिकी है। किसी भी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज़ के लिए नीलामी में मिली यह अब तक की सबसे बड़ी कीमत है। सैफ्रनआर्ट के अनुसार इस पांडुलिपि को भारत के ही एक खरीदार ने खरीदा है जिससे यह ऐतिहासिक धरोहर देश में ही सुरक्षित रहेगी।
इस पांडुलिपि में गांधी के अपने करीबी सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी को भेजे गए रोज़ाना के हाथ से लिखे संदेश शामिल थे। ये संदेश हिंगोरानी की पत्नी विद्या की मृत्यु के बाद दो साल की अवधि में लिखे गए थे। मार्गदर्शन, सांत्वना और चिंतन वाले इन संदेशों को बाद में 'अ थॉट फॉर द डे' (A Thought for the Day) नामक पुस्तक में संकलित किया गया था। खरीदार की पहचान का खुलासा नहीं किया गया, लेकिन सैफ्रनआर्ट ने कहा कि खरीदार भारत से था और पांडुलिपि देश में ही रहेगी।
'गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी. हिंगोरानी' (Gandhi: From the Collection of Anand T Hingorani) शीर्षक वाली 86-लॉट की इस नीलामी में गांधी से जुड़े पत्र, पांडुलिपियां, तस्वीरें और व्यक्तिगत वस्तुएं शामिल थीं। इसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता के रूप में उनकी सार्वजनिक भूमिका से परे महात्मा के जीवन की एक बेहद निजी झलक पेश की।

हाथ से लिखे ये विचार गांधी के दर्शन के केंद्र में मौजूद कई विषयों को छूते हैं जिनमें सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह (संपत्ति का संग्रह न करना), निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता का उन्मूलन, प्रार्थना, सेवा, श्रम, स्वराज, नैतिक ज़िम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा, अनासक्ति और आत्म-साक्षात्कार शामिल हैं। केवल राजनीतिक घटनाओं को दर्ज करने के बजाय यह कलेक्शन गांधी को एक बेहद निजी भूमिका में दिखाता है जिसमें वे अपने करीबी दायरे के किसी व्यक्ति को सलाह, अनुशासन, सांत्वना और स्नेह दे रहे हैं।
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सैफ्रनआर्ट के सह-संस्थापक दिनेश वज़ीरानी ने कहा, आनंद टी. हिंगोरानी कलेक्शन को नीलामी में लाना और गांधी के जीवन और विचारों के एक असाधारण रिकॉर्ड को साझा करना सौभाग्य की बात रही है। उन्होंने कहा कि इन विचारों को मिली ज़बरदस्त प्रतिक्रिया ने उनकी दुर्लभता और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया है और यह जानकारी दी है कि गांधी उन सिद्धांतों को कैसे जीते थे जिनका वे सार्वजनिक रूप से समर्थन करते थे।
अन्य महत्वपूर्ण लॉट के लिए भी ज़बरदस्त बोलियां लगाई गईं। 'मैसेज ऑन गॉड' (Message on God) जिसमें ईश्वर और भगवद गीता पर गांधी के विचारों से संबंधित तीन पांडुलिपियां और पत्राचार की वस्तुएं शामिल थीं, 1.68 करोड़ रुपये में बिका। गांधीजी का 'पेटी चरखा' (बॉक्स वाला चरखा) और उसके साथ सूत कातने के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे दो पत्र, 50-70 लाख रुपये के अनुमान के मुकाबले 1.02 करोड़ रुपये में बिके।

गांधीजी की लिखते हुए एक साइन की हुई तस्वीर 78 लाख रुपये में बिकी जबकि आर्थिक आज़ादी से जुड़े उनके पत्रों, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का एक सेट 57.60 लाख रुपये में बिका। हिंगोरानी परिवार द्वारा पीढ़ियों से संभालकर रखा गया यह कलेक्शन, गांधीजी और हिंगोरानी के बीच दो दशकों से ज़्यादा समय के रिश्ते को दिखाता है।
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पत्र-व्यवहार, तस्वीरें, पांडुलिपियां और निजी चीज़ें न केवल आज़ादी की लड़ाई की अहम घटनाओं को दिखाती हैं, बल्कि एक ऐसी दोस्ती को भी दर्शाती हैं जिसमें मार्गदर्शन, निजी सलाह और लगातार बौद्धिक व आध्यात्मिक आदान-प्रदान शामिल था।

इस तरह रिकॉर्ड बनाने वाली यह पांडुलिपि सिर्फ एक कीमती ऐतिहासिक चीज़ नहीं है। यह गांधीजी की निजी आवाज़ और उन आदर्शों के रोज़मर्रा के अभ्यास की एक दुर्लभ झलक देती है जिन्होंने उनके सार्वजनिक जीवन को आकार दिया।