Edited By Ramkesh,Updated: 23 Sep, 2026 05:51 PM

तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत गुट के नेता अभिषेक बनर्जी ने मतदाता सूची संशोधन से जुड़े फैसलों पर दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराने संबंधी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बुधवार को मांग की कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश...
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत गुट के नेता अभिषेक बनर्जी ने मतदाता सूची संशोधन से जुड़े फैसलों पर दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराने संबंधी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बुधवार को मांग की कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए तथा आयोग के कामकाज की अदालत की निगरानी में जांच कराई जाए।
बनर्जी की यह मांग एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र की उस खबर के सामने आने के कुछ घंटे बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित निर्णयों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। इन आयुक्तों का कहना था कि ये निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे। बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "मुख्य निर्वाचन आयुक्त को तुरंत हटाया जाना चाहिए और अदालत की निगरानी में जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि "कथित तौर पर एक राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के लिए लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना हमारे लोकतंत्र की नींव पर प्रहार है" और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों की न्यायिक जांच की भी मांग की। अभिषेक ने कहा, "पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद, 'इंडिया' गठबंधन के सभी विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को पत्र लिखकर गंभीर चिंताएं जताई थीं।
उन्होंने कहा कि इन आरोपों की "न तो जांच की गई और न ही इन्हें वह तवज्जो दी गई जिसके वे हकदार थे।" सांसद ने कहा, "जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले गंभीर सवाल बार-बार उठाए जाते हैं और फिर भी अनसुने रह जाते हैं तो इससे संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल उठना तय है।" बनर्जी ने सीधे उच्चतम न्यायालय की ओर रुख करते हुए कहा, "उच्चतम न्यायालय इस मामले से मुंह नहीं मोड़ सकता। अंतिम जिम्मेदारी उसी की है।" उन्होंने सवाल किया, "क्या मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ इस पर कार्रवाई करेगी।