Edited By Ramkesh,Updated: 23 Apr, 2026 02:20 PM

विदेशी छात्रों की घटती संख्या ने कनाडा को अपनी शिक्षा और इमिग्रेशन नीति पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब सरकार ने रणनीति बदलते हुए डिप्लोमा और अंडरग्रेजुएट स्तर पर सख्ती बढ़ा दी है, जबकि मास्टर्स और पीएचडी जैसे उच्च शिक्षा कार्यक्रमों के लिए...
इंटरनेशनल डेस्क: विदेशी छात्रों की घटती संख्या ने कनाडा को अपनी शिक्षा और इमिग्रेशन नीति पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब सरकार ने रणनीति बदलते हुए डिप्लोमा और अंडरग्रेजुएट स्तर पर सख्ती बढ़ा दी है, जबकि मास्टर्स और पीएचडी जैसे उच्च शिक्षा कार्यक्रमों के लिए मेधावी छात्रों को आकर्षित करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
अब टॉप स्टूडेंट्स पर नजर
नई नीति के तहत कनाडा सरकार का फोकस उन छात्रों पर है जो रिसर्च और उच्च शिक्षा में योगदान दे सकते हैं। इसके लिए वीजा प्रक्रिया को तेज करते हुए पीएचडी आवेदनों को 14 दिनों के भीतर मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही छात्रों को अपने जीवनसाथी और बच्चों को साथ ले जाने की सुविधा भी दी जा रही है।
क्यों बदलनी पड़ी नीति
आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 2024 में जहां करीब 1.88 लाख स्टडी परमिट जारी हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर लगभग 94 हजार रह गई। कुल विदेशी छात्रों की संख्या में भी करीब 60% की कमी आई है।
नई सुविधा और राहत
- अप्रैल 2026 से लागू होने वाली नई व्यवस्था में:
- मास्टर्स और पीएचडी छात्रों को स्टडी परमिट कैप से छूट
- प्रांतीय सत्यापन पत्र की जरूरत नहीं
- जीवनसाथी को ओपन वर्क परमिट
- बच्चों को स्टडी परमिट
- पढ़ाई के बाद 3 साल तक वर्क परमिट, जिससे PR (स्थायी निवास) का रास्ता आसान
भारत पर खास फोकस
कनाडा ने भारत के साथ शिक्षा सहयोग को भी मजबूत किया है। 20 से अधिक विश्वविद्यालयों ने भारत दौरे के दौरान नई साझेदारियां की हैं, जिनमें संयुक्त डिग्री, रिसर्च और स्कॉलरशिप प्रोग्राम शामिल हैं।
विदेश जाने में भारतीयों का बढ़ता रुझान
पिछले कुछ वर्षों में विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2016 में जहां 6.8 लाख छात्र विदेश गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 13.35 लाख हो गई। आंध्र प्रदेश और पंजाब इस ट्रेंड में सबसे आगे हैं। हालांकि कनाडा का यह बदलाव साफ संकेत देता है कि अब वह संख्या नहीं, बल्कि क्वालिटी स्टूडेंट्स पर ध्यान देना चाहता है। नई नीति से मेधावी छात्रों के लिए मौके बढ़ेंगे, लेकिन सामान्य कोर्स के छात्रों के लिए रास्ता थोड़ा कठिन हो सकता है।