विदेश में पढ़ाई का सपना टूटा ! अमेरिका ने 61% भारतीय छात्र किए रिजेक्ट, ऑस्ट्रेलिया-कनाडा भी दिखा रहे सख्ती

Edited By Updated: 19 Apr, 2026 01:00 PM

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अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की सख्त वीज़ा नीतियों से भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई मुश्किल होती जा रही है। 2025 में अमेरिका में 61% F-1 वीज़ा रिजेक्शन दर्ज हुआ, जबकि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने भी नियम कड़े कर दिए, जिससे अवसर लगातार घट रहे हैं।

International Desk: विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए हालात तेजी से कठिन होते जा रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में 2025 के दौरान F-1 वीज़ा के लिए आवेदन करने वाले 61% भारतीय छात्रों को रिजेक्ट कर दिया गया। यह दर 2023 के 36% और 2024 के 53% के मुकाबले काफी ज्यादा है, जिससे साफ है कि वीज़ा मिलना अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल छात्रों की योग्यता का मामला नहीं है, बल्कि इसमें “जियोग्राफी फैक्टर” भी काम कर रहा है। यूरोप के छात्रों को जहां 90% से अधिक स्वीकृति मिलती है, वहीं भारतीय छात्रों को ज्यादा रिजेक्शन का सामना करना पड़ रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या वीज़ा प्रक्रिया में क्षेत्रीय असमानता बढ़ रही है।

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ऑस्ट्रेलिया- कनाडा ने भी बढ़ाई मुश्किलें
ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी वीज़ा नीति को सख्त कर दिया है। 2026 की शुरुआत में करीब 40% भारतीय छात्र वीज़ा आवेदन खारिज किए गए। इतना ही नहीं, भारत को अब हाई-रिस्क कैटेगरी (EL3) में डाल दिया गया है, जिसके तहत छात्रों को ज्यादा फाइनेंशियल दस्तावेज़, विस्तृत अकादमिक रिकॉर्ड और मजबूत “Genuine Student” स्टेटमेंट देना होगा। कनाडा में भी स्थिति आसान नहीं है। 2025 में स्टडी परमिट की संख्या 64% तक घटा दी गई और 2026 में भी इसमें और 7% कटौती का फैसला लिया गया है। सरकार ने छात्रों की संख्या सीमित करने के लिए सख्त कैप लागू किया है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए अवसर और कम हो गए हैं।

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वीज़ा फैसले केवल शिक्षा के आधार पर नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार अब वीज़ा फैसले केवल शिक्षा के आधार पर नहीं लिए जा रहे, बल्कि इमिग्रेशन से जुड़ी चिंताएं, घरेलू राजनीतिक दबाव और अवैध रूप से रुकने की आशंका भी अहम भूमिका निभा रही है। इसी वजह से भारत, नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे दक्षिण एशियाई देशों के छात्रों पर ज्यादा सख्ती की जा रही है।\इसका असर अब साफ दिखाई देने लगा है। स्टडी एब्रॉड सेवाएं देने वाली कंपनियों के कारोबार में 35 से 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है, और छात्रों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि छात्र घबराएं नहीं, बल्कि अपनी तैयारी को और मजबूत करें, दस्तावेज़ पूरी तरह सही रखें और आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी व व्यवस्थित तरीके से पूरा करें।

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