Edited By Tanuja,Updated: 17 May, 2026 11:45 AM

United Nations में भारत ने Strait of Hormuz में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों को “अस्वीकार्य” बताया। भारत ने कहा कि नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान जरूरी है, क्योंकि इस क्षेत्र से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।
International Desk: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, असैन्य चालक दल को खतरे में डालना और नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना ''अस्वीकार्य'' है। हरीश ने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित आवागमन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानून का ''पूरी तरह से सम्मान'' किया जाना चाहिए। ऊर्जा और आपूर्ति प्रवाह की सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (UNECOSOC) की एक विशेष बैठक में हरीश की ये टिप्पणियां ओमान के तट पर भारतीय ध्वज वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले के कुछ दिनों बाद आईं।
ओमान के अधिकारियों ने सोमालिया से आ रहे जहाज के सभी 14 चालक दल के सदस्यों को बचा लिया लेकिन यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि हमला किसने किया। हरीश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि यूएनईसीओएसओसी की बैठक में उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न हालिया ऊर्जा और उर्वरक संकट के प्रति भारत के दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने कहा, ''संकट से निपटने के लिए अल्पकालिक और व्यवस्थागत उपायों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।'' उन्होंने दोहराया कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, असैन्य चालक दल को खतरे में डालना और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्याप्त नाजुक स्थिति के बीच 13 मई को भारतीय ध्वज वाले जहाज को निशाना बनाकर हमला हुआ था। होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान के तट के करीब एक संकरा जलमार्ग है जिससे होकर दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के कारण दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। इस संघर्ष में अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए जिसके जवाब में ईरान ने भी हमले किए। इससे पूर्व भारत ने इस हमले को ''अस्वीकार्य'' बताया था। संघर्ष शुरू होने के बाद से भारतीय ध्वज वाले कम से कम दो अन्य जहाजों पर भी हमले हो चुके हैं।