Edited By Rohini Oberoi,Updated: 30 Mar, 2026 05:14 PM

भारत सरकार देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। खबर है कि आगामी 1 अप्रैल से देश में Hikvision, Dahua और TP-Link जैसे बड़े चीनी सीसीटीवी (CCTV) ब्रांड्स की बिक्री और इस्तेमाल पर पाबंदी लग सकती है। सरकार का यह कदम...
Chinese CCTV Ban India : भारत सरकार देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। खबर है कि आगामी 1 अप्रैल से देश में Hikvision, Dahua और TP-Link जैसे बड़े चीनी सीसीटीवी (CCTV) ब्रांड्स की बिक्री और इस्तेमाल पर पाबंदी लग सकती है। सरकार का यह कदम उन कैमरों को निशाना बना रहा है जो सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते और जिनमें डेटा लीक होने का बड़ा खतरा है।
क्यों है ये बड़ा खतरा?
लंबे समय से यह बात सामने आ रही थी कि भारत में लगे करोड़ों सीसीटीवी कैमरे सुरक्षित नहीं हैं। इसके पीछे के मुख्य कारण ये हैं। कुछ समय पहले खुलासा हुआ था कि भारतीय रेलवे स्टेशनों पर लगे कैमरों की लाइव फीड पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI तक पहुंच रही थी। हाल के ईरान-इजराइल संघर्ष में देखा गया कि कैसे दुश्मनों ने सीसीटीवी हैक करके लोगों को निशाना बनाया। युद्ध या साइबर हमले के समय ये कैमरे दुश्मन के लिए 'सॉफ्ट टारगेट' बन जाते हैं। ज्यादातर कैमरे इंटरनेट और विदेशी सर्वर से जुड़े होते हैं। अगर इनका सॉफ्टवेयर सुरक्षित नहीं है तो आपकी निजी वीडियो फीड बिना आपकी जानकारी के विदेशी हाथों में जा सकती है।
1 अप्रैल से क्या बदलेगा?
सरकार अब सीसीटीवी कैमरों के लिए नई और सख्त पॉलिसी ला रही है:
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अनिवार्य सर्टिफिकेशन: अब हर कैमरे को हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और डेटा सिक्योरिटी की कड़ी टेस्टिंग से गुजरना होगा। बिना सरकारी सर्टिफिकेट के कोई भी कैमरा नहीं बिक सकेगा।
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सरकारी दफ्तरों पर सख्ती: सरकारी कार्यालयों में अब केवल वही कैमरे लगेंगे जो पूरी तरह सुरक्षित और भारत सरकार द्वारा प्रमाणित (Certified) होंगे।
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सुरक्षा ऑडिट की मांग: विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ नए कैमरों पर बैन काफी नहीं है। पब्लिक प्लेस पर लगे पुराने करोड़ों कैमरों का 'सुरक्षा ऑडिट' करना होगा ताकि उन्हें हैक होने से बचाया जा सके।
बाजार और आम जनता पर असर
इस फैसले के बाद बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है:
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बढ़ सकती है कीमत: सस्ते और असुरक्षित चीनी कैमरों के हटने से सीसीटीवी की कीमतों में कुछ उछाल आ सकता है।
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भारतीय कंपनियों को मौका: सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण अब 'मेड इन इंडिया' और भरोसेमंद विकल्पों की मांग बढ़ेगी।