Janmashtami 2026: 4 या 5 सितंबर कब है जन्माष्टमी? यहां जानें श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Edited By Updated: 18 Jul, 2026 03:01 PM

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Janmashtami 2026 Date: साल 2026 में जन्माष्टमी कब है? जानें 4 या 5 सितंबर में से कौन सी है सही तारीख, कृष्ण जन्म की पूजा का शुभ मुहूर्त, निशिता काल का समय और लड्डू गोपाल की पूजा विधि।

Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व बेहद श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जगत के पालनहार अवतरित हुए थे। इसी उपलक्ष्य में व्रत रखने का विधान है और आधी रात को कान्हा के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। साल 2026 में जन्माष्टमी की तारीख को लेकर भक्तों के बीच कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि उत्सव 4 सितंबर को मनाया जाए या 5 सितंबर को। आइए पंचांग के अनुसार जानते हैं इसकी सटीक तारीख और बाल गोपाल की पूजा विधि।

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Janmashtami 2026 Shubh Muhurat क्या है जन्माष्टमी की सही तारीख?
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की शुरुआत 4 सितंबर 2026 को रात 2 बजकर 25 मिनट पर हो जाएगी। इस तिथि का समापन 5 सितंबर को रात 12 बजकर 13 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, उदयातिथि और मध्यरात्रि (निशिता काल) में अष्टमी की उपस्थिति को देखते हुए 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को ही जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जाएगा।

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जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
निशिता काल यानी अर्धरात्रि पूजा का समय 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। भक्त इसी अंतराल में बाल गोपाल का प्राकट्य उत्सव मना सकते हैं। वहीं, व्रत का पारण अगले दिन यानी 5 सितंबर को सुबह 6 बजकर 01 मिनट के बाद किया जा सकेगा।

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जन्माष्टमी पूजन: प्रातः काल नित्यकर्मों से निवृत्त होकर लाल आसान लगाकर उत्तर मुखी होकर श्री कृष्ण का पूजन करें। इसके पश्चात जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें:

संकल्प: ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट। सिद्धये श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥

तत्पश्चात बालगोपाल की मूर्ति स्थापित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। चंदन की धूप जलाएं। धूप तथा श्री बालगोपाल का विधिवत षोडशोपचार पूजन करें।

षोडशोपचार पूजन विधि: ॐ क्लीं कृष्णाय नमः ध्यायामि - हाथ जोड़कर श्री कृष्ण का ध्यान करें। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः आवाहयामि- प्रणाम करके श्रीकृष्ण का आवाहन करें। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः आसनम् समर्पयामि - फूलों का आसान समर्पित करें। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः अर्घ्यं समर्पयामि - पानी से अर्घ्य दें। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः पाद्यं समर्पयामि - फूल और चावल चढ़ाएं। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः आचमनीयं समर्पयामि - जल चढ़ाकर आचमन कराएं।

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः उप हारं समर्पयामि - फूलों का हार चढ़ाएं। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः पंचामृत स्नानं समर्पयामि - श्री बालगोपाल को पंचामृत से स्नानं कराएं। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः वस्त्र युग्मं समर्पयामि - श्री बालगोपाल पर दो अलग रंग के वस्त्र चढ़ाएं। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः यज्ञोपवीतं धारयामि - श्री बालगोपाल पर जनेऊ चढ़ाएं। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः दक्षिणाम् समर्पयामि - सिक्के चढ़ाएं। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः गंधं धारयामि - चंदन चढ़ाएं। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः अक्षतान् समर्पयामि - चावल चढ़ाएं। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः पुष्पैः पूजयामि - पुष्पांजलि समर्पित करें। 

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः नवैद्यम् समर्पयामि - तुलसीपत्र और मिश्री का भोग लगाएं तथा जो आप इच्छानुसार पकवान बना सकते हैं उनका भोग लगाएं। 

बाएं हाथ में साबुत सुपारी लेकर दाएं हाथ से तुलसी की माला से इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

मंत्र: क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय नमः ।

जाप पूरा होने के बाद इस साबुत सुपारी को पूजा घर में स्थापित करें। इस उपाय से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हर कार्य में सफलता मिलती है। जीवन से समस्याएं और संकट दूर होते हैं तथा जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है।

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