Edited By Tanuja,Updated: 18 Oct, 2026 03:12 PM

चीन की घटती आबादी और कम जन्म दर को लेकर अमेरिकी विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने भारत की सुरक्षा पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि चीन ताइवान के बजाय अरुणाचल प्रदेश में आक्रामकता दिखा सकता है। हालांकि, यह आशंका है, किसी पुष्ट हमले की योजना का प्रमाण नहीं।
Washington: चीन की घटती आबादी और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग जनसंख्या उसके सामने बड़ी आर्थिक और सामाजिक चुनौती बन रही है। अमेरिकी विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने आशंका जताई है कि इन दबावों के बीच चीन भारत के साथ सीमा पर तनाव बढ़ा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि ताइवान पर सैन्य कार्रवाई के मुकाबले अरुणाचल प्रदेश में आक्रामकता दिखाना चीन को कम जोखिम वाला विकल्प लग सकता है।
वन चाइल्ड पॉलिसी का असर
चीन ने 1980 से 2016 तक एक बच्चे की नीति लागू की थी। इसका उद्देश्य जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना था, लेकिन लंबे समय में इससे कम जन्म दर और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी जैसी समस्याएं गहरी हुईं। अब सरकार जन्म दर बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसके नतीजे सीमित रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, भारत 2023 में आबादी के मामले में चीन से आगे निकल गया था। रुबिन ने अनुमान जताया है कि वर्ष 2100 तक चीन की आबादी घटकर करीब 63.3 करोड़ रह सकती है। यह भविष्य का अनुमान है, निश्चित आंकड़ा नहीं।
घटती आबादी बन सकती युद्ध की वजह
रुबिन ने रूस और ईरान के उदाहरण देते हुए तर्क दिया है कि जनसांख्यिकीय दबाव से जूझ रहे देश कभी-कभी बाहरी संघर्षों की ओर बढ़ सकते हैं। रूस ने जॉर्जिया और यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई की, जबकि ईरान के नेतृत्व ने भी घटती जन्म दर को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, किसी देश की घटती आबादी और उसके युद्ध शुरू करने के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं है। सैन्य कार्रवाई के पीछे राजनीतिक, क्षेत्रीय और रणनीतिक कारण भी महत्वपूर्ण होते हैं।
ताइवान के बजाय अरुणाचल
रुबिन के मुताबिक, ताइवान पर हमला करने की स्थिति में चीन को अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप और कठिन समुद्री अभियान जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके विपरीत, भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ाना चीन को अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला विकल्प लग सकता है। उनके आकलन में अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और सिलीगुड़ी गलियारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।
भारत को सैन्य तैयारी बढ़ाने की सलाह
भारत के पूर्व सैन्य अधिकारी जेएस सोढ़ी ने भी चीन से संभावित खतरे को देखते हुए सैन्य क्षमताएं मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है। उनके अनुसार, भारत को सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी तैयारियां बढ़ानी चाहिए और कमजोरियों को समय रहते दूर करना चाहिए। रुबिन ने रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि बड़े संघर्षों की आशंका को कई बार कम करके आंका जाता है। उनका मानना है कि भारत को उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर संभावित चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए।