9-11 साल के बच्चों में बढ़ रहा Heart Attack का खतरा, अमेरिकी संस्थानों की नई गाइडलाइन, कोलेस्ट्रॉल टेस्ट जरूरी

Edited By Updated: 11 Jul, 2026 12:39 PM

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Heart Attack Prevention: आजकल युवाओं में भी हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। इसी बढ़ती चिंता को देखते हुए अमेरिका की प्रमुख हृदय संस्थाओं ने Cholesterol Screening को लेकर नई सिफारिशें जारी की हैं। American College of...

Heart Attack Prevention: आजकल युवाओं में भी हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। इसी बढ़ती चिंता को देखते हुए अमेरिका की प्रमुख हृदय संस्थाओं ने Cholesterol Screening को लेकर नई सिफारिशें जारी की हैं। American College of Cardiology और American Heart Association की नई Dyslipidemia Guidelines 2026 में बच्चों और वयस्कों के लिए कोलेस्ट्रॉल जांच पर ज्यादा जोर दिया गया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, 9 से 11 साल की उम्र के हर बच्चे की कम से कम एक बार Cholesterol Test कराने की सलाह दी गई है। वहीं 19 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को नियमित रूप से Lipid Profile Test कराने की सलाह दी गई है।

बचपन में शुरू हो सकती है दिल की बीमारी की प्रक्रिया
विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर की धमनियों में फैट जमा होने यानी Atherosclerosis की शुरुआत कई लोगों में बचपन या किशोरावस्था से ही हो सकती है। अगर किसी बच्चे में जन्म से ही ज्यादा कोलेस्ट्रॉल (Familial Hypercholesterolemia) या कोई अन्य लिपिड समस्या मौजूद है, तो समय रहते इसकी पहचान की जा सकती है। इससे आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

सिर्फ कोलेस्ट्रॉल नहीं, अब इन 3 टेस्ट पर भी ध्यान
नई गाइडलाइन में सामान्य Lipid Profile के साथ कुछ अतिरिक्त जांचों को भी महत्व दिया गया है।

1. Lipoprotein (a) Test
इस जांच से शरीर में मौजूद आनुवंशिक हार्ट रिस्क का पता लगाने में मदद मिल सकती है। कई बार सामान्य कोलेस्ट्रॉल होने के बावजूद व्यक्ति को दिल की बीमारी का खतरा ज्यादा हो सकता है।

2. Apolipoprotein B (ApoB) Test
Diabetes, Metabolic Syndrome, High Triglycerides जैसी समस्याएं हैं। इससे हार्ट डिजीज के खतरे का बेहतर आकलन किया जा सकता है।

3. Coronary Artery Calcium (CAC) Scan
जिन लोगों में हार्ट अटैक का खतरा स्पष्ट नहीं होता, उनके लिए यह स्कैन डॉक्टरों को यह तय करने में मदद कर सकता है कि दवा की जरूरत है या नहीं।

युवाओं में क्यों बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा?
कम उम्र में दिल की बीमारी बढ़ने के पीछे बदलती जीवनशैली बड़ी वजह मानी जा रही है।

मुख्य कारण:
-ज्यादा समय तक बैठे रहना (Sedentary Lifestyle)
-जंक फूड और Ultra-Processed Food का अधिक सेवन
-मोटापा
-धूम्रपान और तंबाकू
-शराब का सेवन
-लगातार तनाव और चिंता
-पर्याप्त नींद न लेना
-एक्सरसाइज की कमी

इन आदतों की वजह से शरीर में कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और शुगर से जुड़ी समस्याएं कम उम्र में दिखाई देने लगी हैं।

Heart Health की शुरुआत बचपन से जरूरी
नई गाइडलाइन का मुख्य संदेश है कि हार्ट डिजीज की रोकथाम केवल अस्पताल पहुंचने के बाद नहीं, बल्कि बचपन से शुरू होनी चाहिए। समय पर जांच, बेहतर खानपान, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर दिल की बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

क्या करें?
-बच्चों और युवाओं की नियमित Health Screening कराएं
-रोजाना शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा दें
-फास्ट फूड और ज्यादा तेल वाले भोजन को सीमित करें
-धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी रखें
-पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करें

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