कहीं आप गलत कोलेस्ट्रॉल टेस्ट तो नहीं करवा रहे? स्टडी का दावा- केवल ये ब्लड टेस्ट ही बता सकता दिल की बीमारी का खतरा

Edited By Updated: 08 Jul, 2026 07:45 AM

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ApoB Test: हर साल लाखों लोग अपने दिल की सेहत का आकलन करने के लिए कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाते हैं। आमतौर पर डॉक्टर लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) कोलेस्ट्रॉल, जिसे 'बैड कोलेस्ट्रॉल' कहा जाता है, के आधार पर यह तय करते हैं कि किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक...

ApoB Test: हर साल लाखों लोग अपने दिल की सेहत का आकलन करने के लिए कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाते हैं। आमतौर पर डॉक्टर लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) कोलेस्ट्रॉल, जिसे 'बैड कोलेस्ट्रॉल' कहा जाता है, के आधार पर यह तय करते हैं कि किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कितना है और क्या उसे स्टैटिन जैसी दवाओं की ज़रूरत है। हालांकि, एक नई स्टडी बताती है कि केवल LDL की जांच हर व्यक्ति के जोखिम का सही आकलन करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती।

ये टेस्ट ज्यादा सटीक
हाल ही में JAMA में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, एपोलिपोप्रोटीन B (ApoB) टेस्ट दिल की बीमारी के वास्तविक जोखिम का अधिक सटीक संकेतक साबित हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट खून में मौजूद उन हानिकारक लिपोप्रोटीन कणों की कुल संख्या को मापता है जो धमनियों में प्लाक जमा करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके विपरीत, पारंपरिक LDL टेस्ट केवल इन कणों में मौजूद कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को मापता है।

स्टैंडर्ड कोलेस्ट्रॉल टेस्ट क्या बताता है?
सामान्य लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL, हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (HDL) यानी "अच्छा" कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच की जाती है। लंबे समय से LDL को दिल की बीमारी के जोखिम का प्रमुख संकेतक माना जाता रहा है क्योंकि इसका उच्च स्तर धमनियों में प्लाक बनने और रक्त प्रवाह बाधित होने से जुड़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार दो लोगों का LDL स्तर समान होने के बावजूद उनके रक्त में हानिकारक कणों की संख्या अलग-अलग हो सकती है। चूंकि प्रत्येक कण प्लाक बनने में भूमिका निभा सकता है, इसलिए केवल LDL की मात्रा जोखिम की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती।

ApoB टेस्ट कैसे है अलग?
ApoB एक ऐसा प्रोटीन है जो प्रत्येक हानिकारक लिपोप्रोटीन कण, जैसे LDL, की सतह पर मौजूद होता है। इसलिए ApoB टेस्ट इन कणों की कुल संख्या का अनुमान देता है, जिससे यह पता चलता है कि धमनियों को नुकसान पहुंचाने वाले कण रक्त में कितनी मात्रा में मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कणों की संख्या को मापना, उनमें मौजूद कोलेस्ट्रॉल की मात्रा मापने की तुलना में, हृदय रोग के जोखिम का अधिक सटीक आकलन कर सकता है।

किन लोगों के लिए हो सकता है अधिक उपयोगी?
डायबिटीज़, मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम या हाई ट्राइग्लिसराइड्स वाले लोगों में कई बार LDL का स्तर सामान्य दिखाई देता है, लेकिन हानिकारक कणों की संख्या अधिक हो सकती है। ऐसे मामलों में ApoB टेस्ट उन छिपे हुए जोखिमों की पहचान करने में मदद कर सकता है जिन्हें पारंपरिक कोलेस्ट्रॉल जांच नहीं पकड़ पाती। स्टडी के प्रमुख लेखक और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फाइनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रिवेंटिव मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर सियारान कोहली-लिंच के अनुसार, ApoB टेस्ट के आधार पर इलाज तय करने से मौजूदा तरीकों की तुलना में अधिक हार्ट अटैक और स्ट्रोक रोके जा सकते हैं।

स्टडी में क्या सामने आया?
शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडलिंग के जरिए यह तुलना की कि स्टैटिन थेरेपी के लिए योग्य लोगों में इलाज तय करने के अलग-अलग तरीकों का क्या असर पड़ता है। नतीजों में पाया गया कि ApoB स्तर के आधार पर उपचार को आगे बढ़ाने से केवल LDL या नॉन-HDL कोलेस्ट्रॉल पर आधारित रणनीति की तुलना में अधिक हृदय संबंधी घटनाओं को रोका जा सकता है। अध्ययन के अनुसार, ApoB-आधारित मूल्यांकन डॉक्टरों को उन मरीजों की जल्दी पहचान करने में मदद कर सकता है जिन्हें अधिक प्रभावी कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं की आवश्यकता है।

क्या सभी को ApoB टेस्ट करवाना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्टैंडर्ड लिपिड प्रोफाइल ही दिल की सेहत का आकलन करने का पहला और सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला टेस्ट है। ApoB टेस्ट को इसका विकल्प नहीं, बल्कि एक अतिरिक्त जांच के रूप में देखा जाना चाहिए। यह टेस्ट खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनमें डायबिटीज़, मोटापा, मेटाबोलिक सिंड्रोम, हाई ट्राइग्लिसराइड्स, दिल की बीमारी का मजबूत पारिवारिक इतिहास या अन्य जोखिम कारकों के बावजूद सामान्य LDL स्तर पाया जाता है।

 डिस्क्लेमर: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी देता है। यह किसी भी तरह से योग्य मेडिकल राय का विकल्प नहीं है। ज़्यादा जानकारी के लिए हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।  

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