Edited By Rohini Oberoi,Updated: 26 Apr, 2026 04:29 PM

दुनिया भर के शहरों के लिए 'ग्लोबल वार्मिंग' अब सिर्फ एक चेतावनी नहीं बल्कि एक 'साइलेंट किलर' बन चुकी है। विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट ने भविष्य की जो तस्वीर दिखाई है वह बेहद डरावनी है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2050 तक शहरों में रहने वाले उन गरीबों की...
World Bank Report : दुनिया भर के शहरों के लिए 'ग्लोबल वार्मिंग' अब सिर्फ एक चेतावनी नहीं बल्कि एक 'साइलेंट किलर' बन चुकी है। विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट ने भविष्य की जो तस्वीर दिखाई है वह बेहद डरावनी है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2050 तक शहरों में रहने वाले उन गरीबों की संख्या में 700 प्रतिशत का इजाफा होगा जो जानलेवा गर्मी की चपेट में होंगे। यानी आज के मुकाबले सात गुना ज्यादा लोग गर्मी की आग में झुलसने को मजबूर होंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका सबसे भयानक असर ग्लोबल साउथ (विकासशील और गरीब देशों) पर पड़ेगा। खासकर पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया (जिसमें भारत भी शामिल है) के शहरों में हालात बेकाबू हो सकते हैं। शहरों के कंक्रीट के जंगलों की वजह से तापमान सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा महसूस होता है। बाहर काम करने वाले मजदूर, झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले परिवार, बुजुर्ग और बच्चे इस तपिश के सबसे पहले शिकार बनेंगे। गर्मी अब केवल मौसमी परेशानी नहीं रह गई है यह अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्वस्त कर सकती है। अत्यधिक गर्मी के कारण लोग काम नहीं कर पाएंगे जिससे बेरोजगारी और भुखमरी बढ़ेगी।
कूलिंग की मांग बढ़ने से पावर ग्रिड फेल हो सकते हैं। स्कूल बंद करने पड़ेंगे और अस्पतालों में हीट-स्ट्रोक के मरीजों की बाढ़ आ जाएगी। गर्मी से बचने के लिए लोग शहर छोड़कर भागेंगे जिससे माइग्रेशन का बड़ा संकट खड़ा होगा।
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इस प्रलयकारी स्थिति से निपटने के लिए विश्व बैंक ने UN-Habitat और UNEP के साथ मिलकर एक खास हैंडबुक जारी की है। इस 'हैंडबुक ऑन अर्बन हीट मैनेजमेंट' में कुछ सस्ते और असरदार उपाय बताए गए हैं:
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर: शहरों में ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे और बगीचे लगाना।
पैसिव कूलिंग: ऐसी इमारतों का निर्माण जो बिना बिजली के भी ठंडी रहें।
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सफेद छतें और वेंटिलेशन: छतों पर 'कूल पेंट' और बेहतर हवा निकासी के जरिए तापमान कम करना।
नीतिगत बदलाव: सरकारों को गर्मी को एक आपदा मानकर शहर नियोजन (City Planning) में बदलाव करना होगा।
बता दें कि वैज्ञानिकों और विश्व बैंक की यह हैंडबुक एक 'अंतिम चेतावनी' की तरह है। अगर सरकारों और प्रशासन ने अभी कदम नहीं उठाए तो 2050 तक शहर आग के समंदर बन जाएंगे।