Edited By Pardeep,Updated: 29 Jul, 2026 05:53 AM

पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार को एक बार फिर बड़ी चेतावनी दी है। पार्टी ने मंगलवार को कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं और उन्हें प्रताड़ित किया गया, तो वे अपना देशव्यापी...
नई दिल्ली: पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार को एक बार फिर बड़ी चेतावनी दी है। पार्टी ने मंगलवार को कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं और उन्हें प्रताड़ित किया गया, तो वे अपना देशव्यापी आंदोलन फिर से शुरू कर देंगे। पार्टी का आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश को 'हथियार' बनाकर प्रदर्शनकारियों को निशाना बना सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ी चिंता
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने निर्देश दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाए। लेकिन सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास का कहना है कि यह आदेश "देश भर में खतरे की घंटी" की तरह है, क्योंकि सरकार इसका इस्तेमाल शांतिपूर्ण असंतोष को दबाने के लिए कर सकती है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
सीजेपी के अनुसार, भारत सरकार ने 25 जुलाई 2026 को युवाओं को आश्वासन दिया था कि सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी और किसी भी प्रदर्शनकारी को निशाना नहीं बनाया जाएगा। इसी भरोसे पर आंदोलन वापस लिया गया था। प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि सरकार का रुख उस पवित्र आश्वासन के बिल्कुल उलट है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के वकीलों ने अदालत में इस आदेश का विरोध नहीं किया, जो कि "छलपूर्ण" तरीका है।
आज खत्म हो रही है समय सीमा
पार्टी ने सरकार को दी गई मोहलत की याद दिलाते हुए कहा कि आज यह समय सीमा समाप्त हो रही है। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी समझौते के उल्लंघन का दावा करते हुए कहा कि सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने मांग की कि सभी एफआईआर तुरंत वापस ली जाएं, अन्यथा छात्र और युवा एक बार फिर देश की सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
पेपर लीक के खिलाफ था आंदोलन
गौरतलब है कि सीजेपी ने 20 जून से पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर मोर्चा खोल रखा था, जिसमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग थी। 20 जुलाई को निकाले गए 'संसद मार्च' के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, जहां पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया था। इस संघर्ष में प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ 118 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। अब एक बार फिर आंदोलन की सुगबुगाहट ने राजधानी में हलचल तेज कर दी है।