Edited By Parveen Kumar,Updated: 23 Sep, 2026 08:22 PM
देशभर के पॉलीहाउस किसान 25 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के राज्य कार्यालयों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। किसान संरक्षित खेती के लिए सहायता दर में बदलाव, लंबित आवेदनों, सहायता की पात्रता, नए GoC आवेदनों पर रोक और...
नेशनल डेस्क : देशभर के पॉलीहाउस किसान 25 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के राज्य कार्यालयों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। किसान संरक्षित खेती के लिए सहायता दर में बदलाव, लंबित आवेदनों, सहायता की पात्रता, नए GoC आवेदनों पर रोक और संशोधित दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखेंगे।
यह प्रदर्शन अहमदाबाद, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, बेंगलुरु, देहरादून, चंडीगढ़, रायपुर और चेन्नई में आयोजित किए जाएंगे। महाराष्ट्र में गणपति विसर्जन को देखते हुए पुणे में 28 सितंबर और नासिक में 29 सितंबर को प्रदर्शन किया जाएगा।
21 अगस्त का परिपत्र वापस लेने की प्रमुख मांग
पॉलीहाउस किसान संघ की प्रमुख मांग है कि NHB का 21 अगस्त 2026 का संशोधित परिपत्र वापस लिया जाए। संघ का कहना है कि इतने बड़े नीतिगत बदलाव को बिना पर्याप्त संक्रमण अवधि के लागू करने से पहले से प्रक्रिया में चल रही परियोजनाओं में अनिश्चितता पैदा हुई है।
संघ की मांग है कि 21 अगस्त 2026 से पहले जमा किए गए सभी पुराने GoC आवेदन, जिनकी GoC अभी लंबित है, उन्हें भी पुराने नियमों के तहत ही संसाधित किया जाए। राहत केवल उन परियोजनाओं तक सीमित न रहे, जिनकी GoC जारी हो चुकी है।
जिन किसानों ने पुराने नियमों के आधार पर आवेदन जमा किया, आवेदन शुल्क दिया तथा परियोजना की योजना और वित्तीय व्यवस्था शुरू की, उनके मामलों को भी पुराने दिशा-निर्देशों के अंतर्गत स्पष्ट रूप से सुरक्षित किया जाए।
नए GoC आवेदन तत्काल शुरू करने की मांग
किसानों और संरक्षित खेती उद्योग की एक अन्य प्रमुख मांग है कि नए GoC आवेदन तत्काल दोबारा शुरू किए जाएं और नई GoC जारी करने की प्रक्रिया बहाल की जाए। नए आवेदन और GoC प्रक्रिया लंबे समय तक रुकी रहने से केवल किसानों की नई परियोजनाएं ही प्रभावित नहीं होतीं, बल्कि पॉलीहाउस निर्माता, निर्माणकर्ता, सामग्री आपूर्तिकर्ता, कृषि विशेषज्ञ, अभियंता, तकनीशियन और इस क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों पर भी असर पड़ता है।
संघ का कहना है कि यदि NHB को नए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए अतिरिक्त समय चाहिए, तो भी नए आवेदन अनिश्चितकाल तक रोककर नहीं रखे जाने चाहिए। NHB को स्पष्ट प्रक्रिया और समय-सीमा जारी करनी चाहिए।
पुराने और वित्तीय रूप से प्रतिबद्ध परियोजनाओं को सुरक्षा मिले
संघ के अनुसार, कई किसानों ने पहले लागू नियमों के आधार पर अपनी परियोजनाओं के लिए बैंकों से वित्तीय सहायता ली, आवेदन जमा किए, GoC प्राप्त किया, जमीन को बैंक के पास जमानत के रूप में रखा तथा निर्माण और सामग्री की खरीद शुरू कर दी। ऐसे किसानों की मांग है कि संशोधित नियम लागू होने से पहले के निम्न मामलों के लिए स्पष्ट लिखित व्यवस्था जारी की जाए:
- लंबित GoC आवेदन
- GoC जारी हो चुकी परियोजनाएं
- निर्माणाधीन परियोजनाएं
- JIT पूरा हो चुकी परियोजनाएं
- लंबित सहायता दावे
इन सभी वास्तविक और पात्र पुराने मामलों को पुराने नियमों के तहत संसाधित करने की स्पष्ट व्यवस्था की जाए।
50 प्रतिशत सहायता बहाल करने की मांग
संघ ने संरक्षित खेती के लिए सहायता को 50 प्रतिशत से घटाकर 35 प्रतिशत किए जाने पर भी चिंता जताई है। किसानों का कहना है कि सहायता में कमी से उन परियोजनाओं पर वित्तीय बोझ बढ़ता है, जिनकी योजना पहले की लागत और सहायता व्यवस्था को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। संघ की मांग है कि संरक्षित खेती के लिए 50 प्रतिशत सहायता बहाल की जाए, अथवा परियोजना लागत के मानकों को मौजूदा बाजार कीमतों के अनुरूप संशोधित किया जाए।
अन्य प्रमुख मांगें
किसानों ने GoC प्रक्रिया में स्पष्टता, परिवार आधारित पात्रता नियमों की समीक्षा और किसान समूहों को फिर से मान्यता देने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा ₹50,000 + GST आवेदन शुल्क पर पुनर्विचार, पॉलीहाउस के घटकों पर GST को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने और संरक्षित खेती के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की मांग की गई है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- 21 अगस्त 2026 का NHB परिपत्र वापस लिया जाए।
- संरक्षित खेती के लिए 50 प्रतिशत सहायता बहाल की जाए।
- 21 अगस्त से पहले जमा किए गए सभी लंबित GoC आवेदनों को पुराने नियमों के तहत संसाधित किया जाए।
- GoC जारी हो चुकी, निर्माणाधीन, JIT पूरी हो चुकी और लंबित सहायता वाले मामलों को पुराने दिशा-निर्देशों के तहत स्पष्ट संरक्षण दिया जाए।
- नए GoC आवेदन तत्काल दोबारा शुरू किए जाएं और नई GoC जारी करने की प्रक्रिया बहाल की जाए।
- परिवार आधारित पात्रता और किसान समूहों से जुड़े नियमों की समीक्षा की जाए।
- आवेदन शुल्क और GST से जुड़े मुद्दों पर पुनर्विचार किया जाए।
- बड़े नीतिगत बदलावों से पहले उचित संक्रमण अवधि और स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।