Edited By Tanuja,Updated: 07 Apr, 2026 03:00 PM

बांके बिहारी मंदिर को लेकर विवाद अब विस्फोटक हो गया है। गोस्वामी समाज ने सरकार और पुलिस पर साजिश, दबाव और नजरबंदी के आरोप लगाए हैं। एक बार फिर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के दौरे से पहले सेवायतों को घरों में रोकने का दावा किया गया है।
International Desk: दुनिया भर के कृष्ण भक्तों की आस्था का केंद्र वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। मंदिर प्रबंधन और प्रशासन के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ रहा है। वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सत्ता की टकराहट का रणक्षेत्र बनता जा रहा है। गोस्वामी समाज के आरोपों ने पूरे देश को झकझोर दिया है । जिससे लगता है कि मंदिर के अंदर ही एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पहले छवि खराब कर, फिर परंपरा को खत्म करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है?
“साजिश” की बात क्यों उठ रही ?
ताजा घटनाक्रम में गोस्वामी समाज ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने उन्हें फिर से हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर दिया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के मथुरा दौरे से पहले यह कार्रवाई की गई। गोस्वामी परिवारों का कहना है कि उनके घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई ताकि वे बाहर न निकल सकें और मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं न रख सकें। गोस्वामी समाज ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस और प्रशासन ने मिलकर मंदिर को लेकर एक खतरनाक प्लान तैयार किया गया है। उनका दावा है साजिश के तहत
- मंदिर में सिविल ड्रेस में दंगई लोग भेजे जाएंगे।
- जानबूझकर झगड़े और टकराव कराए जाएंगे।
- मंदिर में सेवायत गोस्वामियों और उनके परिवारो को उकसाया जाएगा।
- फिर उनकी छवि को देश-दुनिया में खराब किया जाएगा
- ताकि यह दिखाया जा सके कि मंदिर व्यवस्था उनके हाथ में सुरक्षित नहीं है।
सेवायत गोस्वामी निशाने पर
सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि एक बार फिर मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के मथुरा दौरे से ठीक पहले गोस्वामी परिवारों को उनके ही घरों में रोक दिया गया। यानि बेवजह उनको हाऊस अरेस्ट कर दिया गया। इनमें सबसे अधिक निशाने पर हैं मंदिर के प्रमुख सेवायत अनंत गोस्वामी जिनको जानबूझ फंसाने की साजिश रची जा रही है। वजह है उनका कमेटी के उल-जलूल फैसलों के खिलाफ खुलकर बोलना। यह कोई पहली घटना नहीं है।

7 मार्च को भी इसी तरह गोस्वामी समाज को नजरबंद किए जाने के आरोप लगे थे। यानी यह एक बार की कार्रवाई नहीं, बल्कि लगातार दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है। 7 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री के दौरे वाले दिन मंदिर में खूब हंगामा हुआ था । शर्मनाक बात यह थी कि प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने मंदिर में ही प्रमुख सेवायत अनंत गोस्वामी पर हमला बोल दिया और उनके कपड़े तक फाड़ डाले थे।
गोस्वामी समाज का कहना है
- घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई।
- बाहर निकलने पर अनौपचारिक पाबंदी लगा दी गई।
- मुख्यमंत्री से मिलने और अपनी बात रखने से रोका गया।
क्या है कॉरिडोर का असली मुद्दा?
बांके बिहारी मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भीड़ इतनी ज्यादा हो जाती है कि कई बार भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है। इसी को देखते हुए सरकार एक कॉरिडोर प्रोजेक्ट लाना चाहती है। इस प्रोजेक्ट के तहत
- मंदिर के आसपास का क्षेत्र चौड़ा किया जाएगा।
- आने-जाने के रास्ते बेहतर बनाए जाएंगे।
- भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक व्यवस्था की जाएगी।
- सरकार का कहना है कि यह सब भक्तों की सुरक्षा और सुविधा के लिए जरूरी है।

क्यों विरोध कर रहा गोस्वामी समाज?
गोस्वामी समाज इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि कॉरिडोर के नाम पर मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था खत्म की जा रही है। उनके सदियों पुराने अधिकारों में हस्तक्षेप हो रहा है। मंदिर का नियंत्रण धीरे-धीरे सरकार के हाथ में जा सकता है। गोस्वामियों को डर है कि यह सिर्फ विकास नहीं, बल्कि कब्जे की शुरुआत है। असल टकराव की वजह है नियंत्रण और अधिकार। सरकार चाहती है कि मंदिर का प्रबंधन एक सिस्टम के तहत चले और गोस्वामी चाहते हैं कि परंपरागत तरीके से ही सब कुछ चलता रहे । इसी को लेकर हाई पावर कमेटी बनाई गई, लेकिन यही कमेटी अब विवाद की जड़ बन गई है। गोस्वामी समाज का आरोप है कि कमेटी उनके फैसलों को नजरअंदाज कर रही है और प्रशासनिक दबाव बना रही है।
“यह ट्रैप है”-गुप्त चेतावनी
- गोस्वामी समाज के अंदर से एक सख्त संदेश दिया जा रहा है ।
- मंदिर में आ रहे भक्त खासकर सेवायत गोस्वामी भी उकसावे में मत आएं।
- मंदिर के अंदर कोई झगड़ा मत करें।
- पुलिस या किसी ‘खास व्यक्ति’ की बातों में मत फंसें।
- साफ शब्दों में-“यह एक जाल हो सकता है” जिसके तहत किसी को भी फंसाया जा सकता है।
मामला क्यों बना विस्फोटक?
- यह विवाद अब तीन बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
- क्या मंदिर के अंदर वाकई माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है?
- क्या कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए दबाव बनाया जा रहा है?
- क्या गोस्वामी समाज को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है?