Edited By Parveen Kumar,Updated: 25 Sep, 2026 08:48 PM

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 'मेटा प्लेटफार्म्स' को निर्देश दिया कि वह सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक महिला की छेड़छाड़ कर बनाई गई तस्वीर से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री तुरंत हटा दे। इसने पुलिस से पीड़िता को पूर्ण सुरक्षा...
नेशनल डेस्क : दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 'मेटा प्लेटफार्म्स' को निर्देश दिया कि वह सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ एक महिला की छेड़छाड़ कर बनाई गई तस्वीर से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री तुरंत हटा दे। इसने पुलिस से पीड़िता को पूर्ण सुरक्षा उपलब्ध कराने को भी कहा। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने कहा कि यह एक असाधारण स्थिति है जिसमें मामला सिर्फ़ एक महिला का नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री का भी है। उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली पुलिस इस मामले में संवेदनशील नहीं है, तो अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि वह संवेदनशील बने। उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं - सौरव दास, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को भी नोटिस जारी किया।
महिला ने आरोप लगाया था कि इन लोगों ने उसकी तस्वीर से छेड़छाड़ की और इसे प्रधानमंत्री की तस्वीर से जोड़कर साझा किया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर के लिए तय की और पुलिस को निर्देश दिया कि वह संबंधित महिला को पूरी सुरक्षा दे जिसने कहा है कि उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। महिला की याचिका में कॉजपा नेताओं पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ उसकी 'डीपफेक अश्लील तस्वीरें' फैलाने का आरोप लगाया गया है। इस याचिका में कुछ ऐसी मनगढ़ंत और डीपफेक तस्वीरों को हटाने की मांग की गई थी, जिनमें प्रधानमंत्री के साथ ऐसी अश्लील तस्वीरें प्रसारित की गईं जिनमें महिला के चेहरे से छेड़छाड़ की गई थी। महिला के वकील ने कहा कि इस मामले में पहले ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
हालाँकि, उन्होंने दलील दी कि ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ने या वायरल डीपफेक लिंक को तुरंत हटाने या अवरुद्ध करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। याचिका में कहा गया, ''हाल ही में नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान, प्रतिवादी संख्या 2 से 5 (कॉजपा नेता) और उनके साथियों ने बिना इजाज़त याचिकाकर्ता की निजी तस्वीर हसिल की और कृत्रिम मेधा (एआई) 'फेस-स्वैपिंग टूल' का इस्तेमाल करके उसके चेहरे को भारत के प्रधानमंत्री के साथ जोड़ दिया गया...।'' शुरुआत में, न्यायमूर्ति कठपालिया ने कहा कि आपत्तिजनक सामग्री को हटाने से जुड़ा मामला दीवानी न्यायालय में जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, पीड़ित महिला को एक जगह से दूसरी जगह नहीं दौड़ाया जाना चाहिए और प्रक्रिया यहीं पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा, ''"यह केवल उसके चेहरे की बात नहीं है। ज़ाहिर है, वह एक पीड़ित है।''
न्यायाधीश ने कहा, '' (रिकॉर्ड में) दूसरे चेहरे को भी धुंधला किया जाना चाहिए था। ऐसे मामलों में, मैं इस पर विचार नहीं करता क्योंकि आपके पास दूसरे उपाय मौजूद हैं, लेकिन यह मामला केवल उस महिला का नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री का भी है।'' अदालत ने महिला से कहा कि वह जांच अधिकारी को अपना सही पता दे। इसने पुलिस को निर्देश दिया कि पीड़िता को हरसंभव एवं व्यावहारिक तरीके से पूरी सुरक्षा दी जाए। इसने 'मेटा प्लेटफॉर्म्स' को नोटिस जारी किया और उसे अपने सोशल मीडिया मंचों से आपत्तिजनक सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया।
महिला के मुआवज़े के अधिकार के बारे में अदालत ने कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान हुई किसी गैर-कानूनी हरकत के लिए पीड़िता को प्रदर्शन के आयोजकों से मुआवज़ा मांगने का अधिकार है। साथ ही, अदालत ने यह भी साफ़ किया कि इस याचिका के लंबित रहने से महिला को कानून के तहत मिलने वाली किसी अन्य राहत का दावा करने से नहीं रोका जाएगा। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के अंदर अपनी वस्तुस्थिति रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें इस मामले में की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी हो। साथ ही, अदालत ने रजिस्ट्री से कहा कि वह याचिका और उससे जुड़े दस्तावेज़ों से पीड़िता का नाम एवं वेब लिंक हटा दे। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कुछ लोगों ने उनकी मुवक्किल की तस्वीरों के साथ बहुत ही अश्लील और आपत्तिजनक तरीके से छेड़छाड़ की और ऐसी तस्वीरें बनाईं जिनमें उसे प्रधानमंत्री के साथ दिखाया गया।
वकील ने कहा कि महिला के अनुसार, जंतर-मंतर पर कॉजपा द्वारा आयोजित अवैध प्रदर्शन में अश्लील और अपमानजनक नारों के साथ उन तस्वीरों को बड़े पैमाने पर प्रदर्शित किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन कॉजपा नेताओं ने आयोजित किया था और उनकी मुवक्किल की मर्ज़ी के बिना 'मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स' के सोशल मीडिया मंचों पर छेड़छाड़ की गईं तस्वीरें अपलोड की गईं। महिला ने आरोप लगाया कि कॉजपा के नेताओं ने डीपफेक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके एक खतरनाक और सुनियोजित साइबर-हमला किया तथा सार्वजनिक रूप से उसकी छवि खराब करने की कोशिश की। याचिका में कहा गया, ''आरोपियों ने छेड़छाड़ की गई तस्वीर के बैनर छपवाए, यौन रूप से उकसाने वाले और अपमानजनक नारे लगाए तथा दुर्भावनापूर्ण तरीके से इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया मंचों पर वीडियो अपलोड किए।''