Edited By Ramanjot,Updated: 18 Feb, 2026 06:44 PM

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर जांच प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।
नेशनल डेस्क: प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर जांच प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। एजेंसी का कहना है कि राज्य पुलिस और प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल कर उसके अधिकारियों को रोका गया, डिजिटल साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई और कार्रवाई के दौरान दबाव बनाने की कोशिश की गई।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में हुई तलाशी कार्रवाई है। यह छापा राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म Indian Political Action Committee (I-PAC) के दफ्तर और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत मारा गया था। मामला कथित कोयला तस्करी और उससे जुड़े धन शोधन आरोपों से संबंधित बताया जा रहा है, जिसमें सत्तारूढ़ दल से जुड़े कुछ नाम सामने आने की बात कही गई है।
ED के आरोप क्या हैं?
एजेंसी के अनुसार तलाशी के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बल (CRPF) की मौजूदगी के बावजूद कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई में दखल दिया।
दोपहर के आसपास मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी स्थल पर पहुंचीं। ED का दावा है कि अधिकारियों ने उन्हें हस्तक्षेप न करने का अनुरोध किया, लेकिन कुछ दस्तावेज और डिजिटल उपकरण उनके साथ ले जाए गए।पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की, जबकि एजेंसी का कहना है कि सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। ED ने यह भी कहा कि उसके अधिकारियों को “आतंकित” किया गया और जांच को बाधित करने का सुनियोजित प्रयास हुआ।
राज्य सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने जवाबी हलफनामे में सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनकी मौजूदगी पार्टी के गोपनीय राजनीतिक डेटा—जैसे चुनावी रणनीति और डाटाबेस—की सुरक्षा के लिए थी। उन्होंने दावा किया कि दस्तावेज और डिवाइस ED अधिकारियों की सहमति से लिए गए थे। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार पर एजेंसियों के राजनीतिक दुरुपयोग का आरोप भी लगाया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई Supreme Court of India में 18 फरवरी 2026 को हुई, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। अदालत ने फिलहाल ED की याचिका पर आगे की सुनवाई 18 मार्च तक टाल दी है। इससे पहले कोर्ट ने संबंधित FIR पर अंतरिम रोक लगाई थी और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे।
ED की मांग
एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि राज्य सरकार और पुलिस के आरोपों को खारिज किया जाए। जांच में कथित बाधा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो। राज्य पुलिस पर भरोसा न होने की स्थिति में जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी जाए।