Edited By Vatika,Updated: 18 Feb, 2026 02:15 PM

स्कूलों के ‘अचानक दौरे’ पर घिरे शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
लुधियाना (विक्की) : शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा माछीवाड़ा साहिब के सरकारी स्कूलों के 'अचानक दौरे' के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंत्री ने अपनी पोस्ट में बच्चों की पढ़ाई में लापरवाही बरतने वाले अध्यापकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात लिखी और एक अध्यापक को 'शो काज' नोटिस जारी करने की जानकारी साझा की, जिसके नीचे सैंकड़ों लोगों ने कमेंट करके सरकार और शिक्षा मंत्री की घेराबंदी कर दी है। लोगों का कहना है कि पिछले 4 साल से शिक्षा मंत्री ने सरकारी स्कूलों की कोई सार नहीं ली और अब चुनाव नजदीक आते ही वे अचानक सक्रिय (एक्टिव) हो गए हैं। कमेंट्स में लोगों ने इसे पूरी तरह से ड्रामा करार देते हुए कहा कि पंजाब की 'शिक्षा क्रांति' का बुरा हाल है। लोगों के अनुसार, सरकार स्कूलों में अध्यापकों की कमी को पूरा करने में पूरी तरह फेल हो चुकी है और अब अपनी कमियां छिपाने के लिए अध्यापकों को जलील कर रही है और उनके सिर पर ठीकरा फोड़ रही है।
कमेंट्स में लोगों ने सरकार की शिक्षा क्रांति पर उठाए तीखे सवाल
सोशल मीडिया पोस्ट पर आए लोगों के कमेंट्स ने सरकार की नीतियों की पोल खोलकर रख दी है:

गुरप्रीत सिद्धू ने शिक्षा मंत्री की भाषा पर सवाल उठाते हुए लिखा कि बच्चों को पंजाबी पढ़नी नहीं आती और मंत्री साहब को खुद सही पंजाबी बोलनी नहीं आती।

आर.के. सिद्धू ने लिखा कि मंत्री जी पहले सही पंजाबी बोलना सीखें और अध्यापकों के साथ बात करने का तरीका भी सीखें।

संजीव भटेजा ने लिखा कि जो बच्चे पढ़ रहे हैं उन्हें भी इन्हीं अध्यापकों ने पढ़ाया है, लेकिन अध्यापक साल भर वोटिंग ड्यूटी, बी.एल.ओ. ड्यूटी और सेमिनारों में व्यस्त रहते हैं। साल में केवल 100 दिन पढ़ाई होती है और ऊपर से सरकार का आदेश है कि केवल बच्चों की गिनती बढ़ाओ।

सरबजीत सिंह ने सवाल किया कि जहां स्टाफ ही पूरा नहीं है, वहां कार्रवाई किस पर होगी? वहीं शमशेर ढिल्लों ने लिखा कि 4 साल में प्राइवेट स्कूलों की लूट और माफिया बंद नहीं हुआ। सरकार आम लोगों की आवाज दबाकर और भगत सिंह की सोच को कुचलकर अपना समय निकाल रही है।

गुरी गगत ने सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा कि जब मैथ और साइंस वाले अध्यापक पंजाबी विषय (सब्जेक्ट) पढ़ाएंगे तो ऐसे ही रिजल्ट मिलेंगे। सरकार भर्ती नहीं कर रही और अध्यापकों से फालतू काम करवा रही है।

कुलजीत गिल ने लिखा कि साढ़े 4 साल पहले जब शिक्षा विभाग लावारिस था, तब मंत्री जी जम्मू-कश्मीर के चुनाव प्रभारी बने हुए थे। अब 6 महीने बचे हैं तो यह सब सिर्फ दिखावा है।

बलराज सिद्धू ने पुरानी पेंशन, महिलाओं को 1000 रुपए और शराब माफिया जैसे वादे पूरे न होने के लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया। लोगों ने स्पष्ट किया कि अध्यापक वे विषय पढ़ा रहे हैं जो उन्होंने कभी खुद नहीं पढ़े, क्योंकि सरकार भर्ती करने में नाकाम रही है। जनता ने इस पूरे घटनाक्रम को अध्यापकों का अपमान और सरकार की विफलता बताया है।