Edited By Ramanjot,Updated: 09 Feb, 2026 09:28 PM

तीस हजारी कोर्ट परिसर में एक वकील पर हुए कथित हमले के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस और कोर्ट प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
नेशनल डेस्क: तीस हजारी कोर्ट परिसर में एक वकील पर हुए कथित हमले के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस और कोर्ट प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सोमवार, 9 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में तीन जजों की बेंच ने इस घटना को न्याय व्यवस्था की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय, जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस नितिन साम्ब्रे की बेंच ने पीड़ित वकील को तत्काल 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश दिया है, जो कम से कम अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।
क्या है पूरा मामला?
मामला 7 फरवरी का है। एक वकील ने आरोप लगाया कि तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई के दौरान विरोधी पक्ष के वकील और कुछ अन्य लोगों ने कोर्ट रूम का दरवाजा बंद कर उनके साथ और उनके मुवक्किल के साथ मारपीट और बदसलूकी की। बताया गया कि यह पूरी घटना जज की मौजूदगी में हुई, जिससे कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। इस घटना की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थी, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इसे “गुंडा राज” जैसी स्थिति बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी थी।
हाई कोर्ट ने क्या-क्या निर्देश दिए?
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई अहम आदेश जारी किए। पीड़ित वकील को 24×7 पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, मामले की जांच ACP स्तर के अधिकारी करें, पूरी जांच DCP नॉर्थ की सीधी निगरानी में हो। जांच पूरी तरह निष्पक्ष और दबाव-मुक्त हो और कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी समीक्षा की जाए। जिला अदालत प्रशासन से भी इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा गया। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को तय की गई है।
सुनवाई के दौरान पुलिस और सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि पुलिस को पूरे मामले की जानकारी है। FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें मिली हैं। वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए DCP नॉर्थ ने कहा कि दोनों पक्षों के MLC (मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट) कराए जा रहे हैं। CCTV फुटेज की जांच की जाएगी,सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने साफ कहा कि “कोर्ट परिसर में इस तरह की घटनाएं न्याय प्रणाली की पवित्रता को ठेस पहुंचाती हैं। किसी भी हाल में अदालत की गरिमा से समझौता नहीं किया जाएगा।” कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि वकीलों के बीच हाथापाई होती है, तो यह बार काउंसिल के नियमों का उल्लंघन है। इस मामले में दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) पर भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह घटना न सिर्फ कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था, बल्कि वकीलों के आचरण और अनुशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।