Edited By Pardeep,Updated: 18 Feb, 2026 11:13 PM

दिल्ली में चल रहे AI Impact Summit 2026 के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक के बाद एक विवाद सामने आया है। पहले रोबोट डॉग को लेकर सवाल उठे और अब “सॉकर ड्रोन” को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
नेशनल डेस्कः दिल्ली में चल रहे AI Impact Summit 2026 के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक के बाद एक विवाद सामने आया है। पहले रोबोट डॉग को लेकर सवाल उठे और अब “सॉकर ड्रोन” को लेकर नई बहस छिड़ गई है। यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने दावा किया कि सॉकर ड्रोन को यूनिवर्सिटी ने खुद विकसित किया है। लेकिन वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कहा कि यह ड्रोन असल में विदेशी तकनीक है, जो पहले से बाजार में उपलब्ध है। इन विवादों से अलग, आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ड्रोन सॉकर क्या है और यह कैसे काम करता है।

ड्रोन सॉकर क्या है?
ड्रोन सॉकर (Drone Soccer) एक आधुनिक और टीम आधारित हवाई खेल है। इसमें खिलाड़ी ऐसे ड्रोन उड़ाते हैं जो गोल आकार के मजबूत पिंजरे (spherical cage) में बंद होते हैं। एक टीम में 3 से 5 खिलाड़ी होते हैं। लक्ष्य होता है कि ड्रोन को हवा में लटके हुए गोल रिंग (हूप) के अंदर से पार कराया जाए। जो टीम ज्यादा बार ड्रोन को हूप से पार कराती है, उसे ज्यादा अंक मिलते हैं।
इसे ऐसे समझिए जैसे बास्केटबॉल या फुटबॉल, लेकिन यहां खिलाड़ी नहीं बल्कि ड्रोन खेलते हैं।
इसकी शुरुआत कब और कहां हुई?
ड्रोन सॉकर की शुरुआत लगभग 2016-2017 में दक्षिण कोरिया में हुई थी। कोरिया की कंपनी Helsel Group का दावा है कि उसने 2015 में इस कॉन्सेप्ट को विकसित किया और बाद में इसे खेल के रूप में शुरू किया। आज यह खेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त है। इसे World Air Sports Federation (FAI) द्वारा आधिकारिक खेल के रूप में मान्यता दी गई है।
किस ड्रोन से मिलती है समानता?
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा किया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी का सॉकर ड्रोन, कोरियाई तकनीक से काफी मिलता-जुलता है। साथ ही यह भी कहा गया कि यह ड्रोन वेबसाइट skyballdrone.com पर उपलब्ध Striker V3 ARF मॉडल जैसा दिखता है। इसकी कीमत करीब 453 डॉलर यानी लगभग 40,800 रुपये बताई जा रही है। यह ड्रोन खास तौर पर ड्रोन सॉकर गेम के लिए बनाया गया है। इसके चारों ओर कार्बन फाइबर का मजबूत गोल ढांचा होता है, जो टक्कर से ड्रोन के पंखों और सर्किट को बचाता है।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी कैसे घिरी विवाद में?
AI Impact Summit 2026 के दौरान ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पवेलियन में एक रोबोट डॉग दिखाया गया। इस रोबोट को “Orion” नाम दिया गया और इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की इनोवेशन बताया गया। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सवाल उठाए कि क्या यह रोबोट सच में यूनिवर्सिटी की खुद की खोज है? बाद में पता चला कि यह रोबोट काफी हद तक Unitree Go2 जैसा है, जिसे चीन की कंपनी Unitree Robotics ने 2023 में लॉन्च किया था और यह पहले से दुनिया भर में बेचा जा रहा है। रोबोट डॉग विवाद के बाद अब सॉकर ड्रोन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सच में यूनिवर्सिटी का खुद का विकसित उत्पाद है या पहले से मौजूद विदेशी तकनीक है।