ऑपरेशन के बाद आठ महिलाओं और एक नाबालिग की मौत, राज्य सरकार ने विशेषज्ञ टीमें भेजीं

Edited By Updated: 11 Jul, 2026 10:59 PM

eight women and a minor die after surgery

राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों के दो सरकारी अस्पतालों के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागों में सर्जरी (ऑपरेशन) कराने वाली आठ महिलाओं और एक नाबालिग की पिछले सप्ताह मौत हो गई। राज्य सरकार ने इन घटनाओं की जांच के लिए विशेषज्ञ टीमें भेजी हैं।...

नेशनल डेस्क : राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा जिलों के दो सरकारी अस्पतालों के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागों में सर्जरी (ऑपरेशन) कराने वाली आठ महिलाओं और एक नाबालिग की पिछले सप्ताह मौत हो गई। राज्य सरकार ने इन घटनाओं की जांच के लिए विशेषज्ञ टीमें भेजी हैं। अधिकारियों ने बताया कि मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में पांच महिलाओं की मौत हुई है। अस्पताल के अधीक्षक अरुण गौड़ ने बताया कि संक्रमण नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है और मामले की जांच जारी है। उन्होंने बताया कि जिस ऑपरेशन थिएटर का एक नमूना संतोषजनक नहीं पाया गया था, उसे पिछले तीन दिनों से बंद रखा गया है।

बांसवाड़ा में सात से 10 जुलाई के बीच तीन महिलाओं और एक नाबालिग की मौत हुई, जिसके बाद विशेषज्ञ समिति से जांच कराई जा रही है। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मौत के मामलों को राज्य सरकार गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि घटनाओं के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय से विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम दोनों जिलों में भेजी गई है।

मंत्री ने कहा कि सोमवार को राज्य के स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ इन मामलों को लेकर बैठक होगी, जिसमें आवश्यक सुधारात्मक कदमों पर चर्चा की जाएगी और सुझावों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। खींवसर ने भीलवाड़ा के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी अस्पताल की प्रारंभिक रिपोर्ट मिल गई है, जिसमें ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि छह दिनों के दौरान जिन पांच महिलाओं की मौत हुई, वे अलग-अलग तारीखों में हुईं और प्रत्येक मामले में मृत्यु का कारण अलग-अलग चिकित्सकीय जटिलताएं थीं।

मंत्री ने बताया कि इन मामलों में हृदयाघात, हाइपोवोलेमिक शॉक, पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म, गर्भावस्था से संबंधित गंभीर उच्च रक्तचाप के कारण एचईएलएलपी सिंड्रोम और प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव जैसी गंभीर स्थितियां सामने आईं। खींवसर ने कहा, "किसी भी मामले में मृत्यु का कारण एक समान अथवा ऑपरेशन थिएटर संक्रमण नहीं पाया गया।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन थिएटर का 'माइक्रो-बायोलॉजिकल कल्चर' कराना संक्रमण नियंत्रण की नियमित और मानक प्रक्रिया का हिस्सा है। मंत्री ने कहा कि निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार 'फ्यूमिगेशन' और 'डिसइन्फेक्शन' के बाद कल्चर रिपोर्ट आने तक संबंधित ऑपरेशन थिएटर का उपयोग नहीं किया जाता है।

अस्पताल अधीक्षक गौड़ ने भी बताया कि ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू से नमूने लेना नियमित प्रक्रिया है। उन्होंने बताया, "संक्रमण नियंत्रण समिति के दिशा-निर्देशों के अनुसार लगातार 'डिसइन्फेक्शन' और 'स्टरलाइजेशन' किया जाता है। अगर कोई नमूना तय मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो संबंधित ऑपरेशन थिएटर को तुरंत इस्तेमाल से हटा दिया जाता है।" गौड़ ने बताया कि जिस ऑपरेशन थिएटर में नमूना असंतोषजनक पाया गया था, उसे पिछले तीन दिनों से बंद रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि मौतों और ऑपरेशन थिएटर में बैक्टीरिया की मौजूदगी के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच की जा रही है। वहीं, बांसवाड़ा के जिलाधिकारी डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने अस्पताल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित अन्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

यादव ने बताया, "सात से 10 जुलाई के बीच चार महिलाओं की मौत की सूचना मिली है। दो मरीजों को गंभीर हालत में लाया गया था, जबकि दो मामलों में सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था।" उन्होंने बताया कि मौतों की विस्तृत जांच के लिए चिकित्सकों की पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। अधिकारियों ने बताया कि एक मामले में ग्रामीण क्षेत्र में गर्भपात से जुड़ी जटिलताओं के बाद एक नाबालिग लड़की को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था, जिसकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई। यादव ने बताया, "पांच चिकित्सकों की समिति बनाई गई है और जयपुर से भी एक टीम आ रही है।

रिपोर्ट आने के बाद मौतों के सही कारणों का पता चलेगा। अगर किसी भी स्तर पर कोई चूक पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।" उन्होंने बताया कि जांच के तहत मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और अस्पताल के कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारी ने बताया, "कोशिश हर मौत के सही कारण का पता लगाने की है। जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।" मंत्री ने बताया कि विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर प्रत्येक मामले की गहन जांच करेगी। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण हैं तथा प्रभावित परिवारों के प्रति राज्य सरकार गहरी संवेदना व्यक्त करती है। खींवसर ने स्पष्ट किया कि अगर किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

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