बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी पड़ेगी भारी! अब सीधे सैलरी से कटेगा हिस्सा

Edited By Updated: 30 Mar, 2026 10:14 AM

failure to take care of elderly parents will result in salary deductions

समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और बुजुर्गों की दयनीय स्थिति को देखते हुए सरकार एक ऐसा क्रांतिकारी कानून लाने की तैयारी में है जो सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को अपने माता-पिता की सेवा के लिए मजबूर कर देगा। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य यह...

नेशनल डेस्क। समाज में गिरते नैतिक मूल्यों और बुजुर्गों की दयनीय स्थिति को देखते हुए सरकार एक ऐसा क्रांतिकारी कानून लाने की तैयारी में है जो सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को अपने माता-पिता की सेवा के लिए मजबूर कर देगा। इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर कर्मचारी समाज के लिए एक आदर्श बने और अपने बुजुर्ग माता-पिता को बेसहारा न छोड़े।

कलेक्टर होंगे पावरफुल, 60 दिन में होगा फैसला

नए प्रस्ताव के मुताबिक अगर कोई बच्चा अपने माता-पिता का ख्याल नहीं रखता तो माता-पिता इसकी शिकायत जिला कलेक्टर से कर सकेंगे। शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर दोनों पक्षों (माता-पिता और कर्मचारी) को बुलाकर उनकी बात सुनेंगे। कर्मचारी को अपनी कमाई के सभी स्रोतों की जानकारी देनी होगी। कलेक्टर को हर हाल में 60 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होगा।

सीधे बैंक खाते में आएगी सम्मान राशि

जांच के बाद यदि शिकायत सही पाई जाती है तो कलेक्टर एक आदेश जारी करेंगे। इस आदेश के तहत कर्मचारी की सैलरी (वेतन) से एक निश्चित राशि की कटौती की जाएगी। सबसे खास बात यह है कि यह पैसा किसी बिचौलिये के पास नहीं, बल्कि सीधे माता-पिता के बैंक खाते में जमा किया जाएगा। इसमें केवल जैविक माता-पिता ही नहीं बल्कि सौतेले माता-पिता को भी सहायता पाने का अधिकार होगा।

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कलेक्टर के फैसले को चुनौती देने के लिए आयोग

अगर कोई पक्ष कलेक्टर के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो उसके लिए वरिष्ठ नागरिक आयोग के गठन का प्रस्ताव है। इस आयोग के अध्यक्ष हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज होंगे। आयोग में प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र के दो अनुभवी विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल होंगे। इस आयोग के पास 'अर्ध-न्यायिक' (Semi-judicial) शक्तियां होंगी। यह गवाहों को समन भेज सकता है, जांच कर सकता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना भी लगा सकता है।

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