Som Pradosh Vrat Katha, 30 March 2026: आज शाम सोम प्रदोष व्रत पर पढ़ें ये कथा, भगवान शिव की कृपा से पूर्ण होंगी सभी मनोकामनाएं

Edited By Updated: 30 Mar, 2026 08:56 AM

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Som Pradosh Vrat Katha, 30 March 2026: आज मार्च माह का दूसरा सोम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है और इसे अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा...

Som Pradosh Vrat Katha, 30 March 2026: आज मार्च माह का दूसरा सोम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है और इसे अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, इसलिए इसे त्रयोदशी व्रत भी कहा जाता है। सामान्यतः महीने में दो प्रदोष व्रत होते हैं, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में एक ही महीने में तीन प्रदोष व्रत भी पड़ सकते हैं जैसा कि इस वर्ष मार्च में हुआ है।

इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रदोष व्रत कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। विशेष रूप से गरीब ब्राह्मणी की कथा का श्रवण शुभ फलदायी माना जाता है।

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Som Pradosh Vrat Katha सोम प्रदोष व्रत कथा: धार्मिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक गरीब विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ रहती थी। जीविका चलाने के लिए वह प्रतिदिन भिक्षा मांगती थी। एक दिन घर लौटते समय उसे एक घायल बालक मिला। दया वश वह उसे अपने घर ले आई और उसकी सेवा करने लगी।

वह बालक वास्तव में विदर्भ राज्य का राजकुमार था, जिसके राज्य पर शत्रुओं ने आक्रमण कर दिया था और उसके पिता को बंदी बना लिया गया था।

कुछ समय बाद एक गंधर्व कन्या अंशुमति ने राजकुमार को देखा और उस पर मोहित हो गई। उसके माता-पिता को भी राजकुमार पसंद आया। तभी भगवान शिव ने स्वप्न में उन्हें आदेश दिया कि दोनों का विवाह कर दिया जाए। उन्होंने वैसा ही किया।

उधर, ब्राह्मणी नियमित रूप से प्रदोष व्रत करती थी। उसके व्रत के प्रभाव और गंधर्वों की सहायता से राजकुमार ने अपने शत्रुओं को परास्त कर अपने राज्य को पुनः प्राप्त कर लिया। इसके बाद उसने ब्राह्मणी के पुत्र को अपना मंत्री बना लिया और सभी सुखपूर्वक रहने लगे।

धार्मिक महत्व: मान्यता है कि जैसे उस ब्राह्मणी के प्रदोष व्रत के प्रभाव से राजकुमार का भाग्य बदला, वैसे ही इस व्रत को श्रद्धा से करने वाले भक्तों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। भगवान शिव की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

सोम प्रदोष व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। इस दिन की गई पूजा और कथा श्रवण भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।

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