Edited By Anu Malhotra,Updated: 29 Sep, 2026 10:05 AM

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ऑटोमोबाइल कंपनी में सीनियर पद पाने के लिए नौकरी और सैलरी के फ़र्ज़ी रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है। देवेंद्र कुमार दुबे 20 अगस्त, 2025 को श्रीतुलजा भवानी ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट...
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ऑटोमोबाइल कंपनी में सीनियर पद पाने के लिए नौकरी और सैलरी के फ़र्ज़ी रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है। देवेंद्र कुमार दुबे 20 अगस्त, 2025 को श्रीतुलजा भवानी ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर शामिल हुए।
पुलिस शिकायत के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि वे पहले लैंडमार्क ग्रुप के साथ काम कर चुके हैं और ऐसे दस्तावेज़ जमा किए जिनमें उनकी मासिक सैलरी ₹2,80,670 दिखाई गई थी। इन दस्तावेज़ों से कंपनी को यकीन हो गया कि दुबे ने उस बिज़नेस ग्रुप में सीनियर पद पर काम किया था। उनके द्वारा जमा किए गए अनुभव प्रमाण पत्र और बैंक स्टेटमेंट के आधार पर उन्हें सीनियर भूमिका में नियुक्त किया गया।
पुलिस ने बताया कि कंपनी दुबे के काम से संतुष्ट थी। बाद में उनकी ज़िम्मेदारियां बढ़ाई गईं और उन्हें ग्रुप CEO (आफ्टर सेल्स) का पद दिया गया। दुबे ने मई 2026 में इस्तीफ़ा देने से पहले लगभग 9 महीने तक कंपनी के साथ काम किया। इस्तीफ़े के बाद कंपनी की वेरिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान इस कथित धोखाधड़ी का पता चला। फ़ुल-एंड-फ़ाइनल सेटलमेंट के हिस्से के तौर पर, HR डिपार्टमेंट ने उनकी पिछली नौकरी और सैलरी की जानकारी की जांच शुरू की।
कंपनी ने दुबे की नौकरी के इतिहास की पुष्टि करने के लिए लैंडमार्क ग्रुप से संपर्क किया। पुलिस ने बताया कि ग्रुप ने उन्हें सूचित किया कि दुबे ने वहां कभी काम नहीं किया था और उनके नाम पर नौकरी का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। सैलरी की जानकारी पर भी सवाल उठे।
रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं ने कहा कि दुबे द्वारा जमा किया गया बैंक स्टेटमेंट, जिसमें मासिक सैलरी ₹2,80,670 दिखाई गई थी, कथित तौर पर फ़र्ज़ी था। पुलिस ने आगे कहा कि दस्तावेज़ों पर दुबे के हस्ताक्षर थे। इसके बाद कंपनी ने अपने मैनेजमेंट को गड़बड़ियों के बारे में सूचित किया और ग्वालियर क्राइम ब्रांच से संपर्क किया।
क्राइम ब्रांच ने धोखाधड़ी और फ़र्ज़ी दस्तावेज़ तैयार करने व इस्तेमाल करने से संबंधित धाराओं के तहत दुबे के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया। तब तक दुबे ग्वालियर छोड़ चुके थे। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस का इस्तेमाल करके उन्हें कानपुर में ट्रेस किया। इसके बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम पांकी पुलिस स्टेशन इलाके में स्थित वैष्णवी कुटी पहुंची और छापेमारी के दौरान उसे गिरफ़्तार कर लिया। उसे वापस ग्वालियर लाया गया, अदालत में पेश किया गया और बाद में जेल भेज दिया गया।
जांच करने वाले अधिकारी अब यह पता लगा रहे हैं कि कथित फ़र्ज़ी अनुभव प्रमाण-पत्र और बैंक स्टेटमेंट कैसे बनाए गए थे। वे यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या दस्तावेज़ तैयार करने या उनका इस्तेमाल करने में दुबे की किसी ने मदद की थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या ये दस्तावेज़ खास तौर पर ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी पाने के लिए बनाए गए थे या इनका इस्तेमाल कहीं और नौकरी के लिए भी किया गया था।