Gold Import Duty: सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत, Gold-Silver सस्ते होने के संकेत, सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Edited By Updated: 12 Jun, 2026 12:26 PM

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर सरकार ने दोनों कीमती धातुओं के आयात शुल्क मूल्य में कमी कर दी है। आयात शुल्क मूल्य वह कीमत है जिसके आधार पर ऐसी चुनिंदा वस्तुओं पर आयात शुल्क लगाया जाता है जिनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय...

नई दिल्ली: सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने गोल्ड और सिल्वर के बेस इंपोर्ट प्राइस में कटौती का बड़ा फैसला लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर सरकार ने दोनों कीमती धातुओं के बेस इंपोर्ट प्राइस में कमी कर दी है। आयात शुल्क वह कीमत है जिसके आधार पर ऐसी चुनिंदा वस्तुओं पर बेस इंपोर्ट प्राइस लगाया जाता है जिनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बदलती रहती है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा गुरुवार रात जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सोने का बेस इंपोर्ट प्राइस अब 1,343 डॉलर प्रति 10 ग्राम होगा। इससे पहले 29 मई को सोने का बेस इंपोर्ट प्राइस मूल्य 1,423 डॉलर प्रति 10 ग्राम निर्धारित किया गया था। इस प्रकार इसमें 80 डॉलर की कटौती की गयी है। चांदी का आयात शुल्क मूल्य 276 डॉलर घटाकर 2,092 डॉलर प्रति किलोग्राम किया गया है। इससे पहले 29 मई को यह 2,368 डॉलर प्रति किलोग्राम तय किया गया था। 

सोने के बेस इंपोर्ट प्राइस में यह लगातार दूसरी तथा चांदी में लगातार तीसरी कटौती है। इससे पहले 29 मई को भी दोनों कीमती धातुओं के बेस इंपोर्ट प्राइस घटाये गये थे। चांदी में 19 मई को भी कटौती की गयी थी। उससे पहले 15 मई को दोनों के बेस इंपोर्ट प्राइस बढ़े थे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर बेस इंपोर्ट प्राइस में हर पखवाड़े बदलाव किया जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय में कीमतों में भारी उथल-पुथल के कारण एक पखवाड़े से कम समय में ही समीक्षा की आवश्यकता पड़ रही है। 

बेस इंपोर्ट प्राइस घटने से सस्ता हो जाएगा सोना?
अक्सर लोगों को लगता है कि सरकार द्वारा गोल्ड का बेस इंपोर्ट प्राइस कम किए जाने से सोने की कीमतें तुरंत घट जाएंगी लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। बेस इंपोर्ट प्राइस में कमी का सीधा फायदा सबसे पहले आयातकों और ज्वेलर्स को मिलता है, क्योंकि इससे उनकी लैंडेड कॉस्ट कुछ हद तक कम हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों तक इसका पूरा लाभ पहुंचेगा या नहीं, यह कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

सोने की खुदरा कीमत तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड के दाम, डॉलर-रुपया विनिमय दर, कस्टम ड्यूटी, जीएसटी, ज्वेलर्स का मार्जिन, मेकिंग चार्ज और घरेलू मांग जैसी कई चीजें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि बेस इंपोर्ट प्राइस में कटौती होने के बावजूद यह जरूरी नहीं कि अगले ही दिन ज्वेलरी दुकानों में सोने के भाव उसी अनुपात में कम हो जाएं। ग्राहकों को वास्तविक राहत तभी मिलती है जब अन्य बाजार परिस्थितियां भी कीमतों के पक्ष में हों।

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