चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा प्लान, एथेनॉल के लिए गन्ने पर लग सकती है रोक

Edited By Updated: 10 Aug, 2026 09:02 PM

government s major plan regarding rising sugar prices

केंद्र सरकार चीनी की बढ़ती कीमतों और अगले सीजन में संभावित उत्पादन कमी को देखते हुए बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने या पूरी तरह रोकने पर विचार कर रही...

नेशनल डेस्क : केंद्र सरकार चीनी की बढ़ती कीमतों और अगले सीजन में संभावित उत्पादन कमी को देखते हुए बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। सरकार अक्टूबर से शुरू होने वाले नए सीजन में एथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने या पूरी तरह रोकने पर विचार कर रही है। सरकार और उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस कदम का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है।

दरअसल, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में इस साल कम बारिश हुई है। इससे अगले साल चीनी उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा गन्ने का इस्तेमाल चीनी बनाने में किया जाए, ताकि घरेलू जरूरत पूरी हो सके और संभावित कमी के चलते भारत को चीनी आयात न करनी पड़े।

करीब 30 लाख टन चीनी पर नजर

मौजूदा सीजन में सितंबर तक चीनी मिलों ने करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी के बराबर मात्रा का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में किया। यह देश के कुल चीनी उत्पादन का लगभग 10 फीसदी है। अगर अगले सीजन में एथेनॉल के लिए चीनी के इस्तेमाल को सीमित किया जाता है, तो घरेलू बाजार में करीब 30 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध हो सकती है। इससे महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश के कारण उत्पादन में संभावित गिरावट की भरपाई करने में मदद मिल सकती है।

एक महीने में 10% बढ़ी चीनी की कीमत

देश में चीनी की कीमत पिछले एक महीने में करीब 10 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। बाजार में कम उपलब्धता और त्योहारों के सीजन में बढ़ती मांग को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। सरकार चीनी मिलों को गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाने से रोकने पर विचार कर सकती है। इसके बजाय उन्हें मुख्य रूप से सी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाने की अनुमति दी जा सकती है। बी-हेवी शीरे में चीनी की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है, जबकि सी-हेवी शीरा चीनी का अधिकांश हिस्सा निकालने के बाद बचने वाला उप-उत्पाद होता है।

एथेनॉल लक्ष्य पूरा करने के लिए बढ़ाना होगा मक्का-चावल का इस्तेमाल

सरकार ने पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। ऐसे में अगर गन्ने से एथेनॉल का उत्पादन कम किया जाता है, तो इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मक्का और चावल से एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाना पड़ सकता है।

फिलहाल देश में मक्का और चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। ऐसे में सरकार के सामने एक तरफ चीनी की कीमतों और उपलब्धता को नियंत्रित करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!