Edited By Purnima Singh,Updated: 21 Jul, 2026 11:35 AM

आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही एयरलाइन स्पाइसजेट (SpiceJet) में एक गल्फ आधारित एयरलाइन ने संभावित निवेश या अधिग्रहण (Acquisition) की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ महीने पहले एक एडवाइजरी फर्म के माध्यम से एयरलाइन की...
नेशनल डेस्क : आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही एयरलाइन स्पाइसजेट (SpiceJet) में एक गल्फ आधारित एयरलाइन ने संभावित निवेश या अधिग्रहण (Acquisition) की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ महीने पहले एक एडवाइजरी फर्म के माध्यम से एयरलाइन की शुरुआती ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) की गई थी। हालांकि यह प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है और अब तक कोई औपचारिक प्रस्ताव (Formal Proposal) नहीं दिया गया है।
कंट्रोलिंग स्टेक या पूरी एयरलाइन खरीदने पर विचार
सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि गल्फ एयरलाइन स्पाइसजेट में कंट्रोलिंग स्टेक खरीदने की योजना बना रही है या फिर पूरी कंपनी के अधिग्रहण पर विचार कर रही है। इस संबंध में स्पाइसजेट से संपर्क किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
भारत-गल्फ रूट्स बने सबसे बड़ा आकर्षण
एविएशन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस संभावित रुचि के पीछे सबसे बड़ी वजह भारत और खाड़ी देशों (Gulf) के बीच मौजूद द्विपक्षीय उड़ान अधिकार (Bilateral Flying Rights) हैं। यदि किसी विदेशी एयरलाइन के पास भारतीय एयरलाइन का स्वामित्व होता है, तो उसे इन महत्वपूर्ण और लाभदायक अंतरराष्ट्रीय रूट्स तक रणनीतिक पहुंच मिल सकती है।
बोइंग 737 बेड़े से मिल सकती है परिचालन बढ़त
सूत्रों के अनुसार, संभावित निवेशक एयरलाइन भी बोइंग 737 विमान संचालित करती है, ठीक वैसे ही जैसे स्पाइसजेट। ऐसे में दोनों कंपनियों के बेड़े की समानता परिचालन, रखरखाव और लागत के स्तर पर बेहतर तालमेल (Operational Synergy) प्रदान कर सकती है।
एक एविएशन विशेषज्ञ का कहना है कि गल्फ एयरलाइंस लंबे समय से भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन द्विपक्षीय एयर सर्विस समझौतों के कारण अतिरिक्त उड़ान अधिकार सीमित हैं। ऐसे में किसी भारतीय एयरलाइन का अधिग्रहण उनके लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है।
भारी कर्ज और नुकसान से जूझ रही है स्पाइसजेट
स्पाइसजेट की बैलेंस शीट पर करीब 9,000 करोड़ रुपये के संचयी घाटे और बड़ी देनदारियों का दबाव बना हुआ है। हालांकि कंपनी ने हाल के महीनों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) और कई सर्विस एग्रीमेंट्स के सेटलमेंट के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया है। इन कदमों के बाद कंपनी की नेट वर्थ दोबारा सकारात्मक (Positive) स्तर पर पहुंचने में सफल रही है।