US New Visa Rules: क्या बीच में ही लटक जाएगी भारतीय छात्रों की पढ़ाई? FIIDS ने दी बड़ी चेतावनी

Edited By Updated: 21 Jul, 2026 12:05 PM

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FIIDS के अनुसार, यह नियम 16-17 जुलाई को तय किया गया था और सितंबर के मध्य से लागू होने वाला है। संगठन ने कहा कि यह नियम दशकों पुरानी "ड्यूरेशन ऑफ़ स्टेटस" (स्टेटस की अवधि) पॉलिसी को खत्म करता है

US New Visa Rules: भारतीय समुदाय के एक पॉलिसी ग्रुप ने चेतावनी दी है कि F-1 और J-1 वीजा पर चार साल की नई समय-सीमा से विदेशी छात्र अपनी डिग्री या रिसर्च के बीच में ही अमेरिका छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज़' (FIIDS) ने चुने हुए अधिकारियों और US सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ (USCIS) से 'डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी' के इस नियम को तुरंत लागू न करने की अपील की है। 

जानें क्या है नया नियम?
FIIDS के अनुसार, यह नियम 16-17 जुलाई को तय किया गया था और सितंबर के मध्य से लागू होने वाला है। संगठन ने कहा कि यह नियम दशकों पुरानी "ड्यूरेशन ऑफ़ स्टेटस" (स्टेटस की अवधि) पॉलिसी को खत्म करता है और अधिकतम चार साल तक रहने की सीमा तय करता है। इसमें 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' और 'STEM OPT' को भी इसी सीमा में गिना जाता है। FIIDS ने कहा कि यह नियम पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले ग्रेस पीरियड (अतिरिक्त समय) को 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर देता है और छात्रों को किसी भी तरह के विस्तार (एक्सटेंशन) के लिए फॉर्म I-539 के जरिए USCIS की मंजूरी लेने की जरूरत होती है। FIIDS में पॉलिसी और स्ट्रैटेजी के प्रमुख खंडेराव कांड ने कहा, "यह US की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धा क्षमता) को खुद पहुंचाया गया नुकसान है।" उन्होंने कहा, "4 साल की सीमा आधुनिक डिग्री के काम करने के तरीके से मेल नहीं खाती। बैचलर डिग्री के लिए औसत समय लगभग 52 महीने और PhD के लिए लगभग 5.7 साल होता है, जबकि USCIS के पास पहले से ही 11 मिलियन से ज़्यादा मामले लंबित हैं, जिनकी प्रोसेसिंग में लगभग एक साल का समय लगता है।" उन्होंने कहा, "छात्रों को प्रोग्राम या रिसर्च के बीच में ही बाहर जाना पड़ सकता है, लैब जरूरी टैलेंट खो देंगी और अमेरिका अपनी इनोवेशन पाइपलाइन प्रतिस्पर्धियों को सौंप देगा।" 

ग्रेजुएशन में हो सकती है देरी- FIIDS
FIIDS ने कहा कि कई रिसर्च-इंटेंसिव प्रोग्राम, खासकर डॉक्टरेट कोर्स और मेडिकल ट्रेनिंग, अक्सर चार साल से ज़्यादा समय लेते हैं। संगठन ने कहा कि J-1 रिसर्च स्कॉलर्स और डॉक्टरों को भी अपने प्रोग्राम पूरे करने में अक्सर पाँच से सात साल लग जाते हैं। ग्रुप ने चेतावनी दी कि एक्सटेंशन को लेकर अनिश्चितता से लैब के काम में रुकावट आ सकती है, ग्रेजुएशन में देरी हो सकती है और विदेशी टैलेंट पर निर्भर फैकल्टी भर्ती योजनाओं पर बुरा असर पड़ सकता है। कांड ने कहा, "इसे लागू करने में देरी करें, छात्रों की रक्षा करें और US की रिसर्च और इनोवेशन को सुरक्षित रखें।" "अगर मकसद ईमानदारी बनाए रखना है, तो ऐसा उन डिग्री पाथवे को खत्म किए बिना करें जो अमेरिकी लैब और स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाते हैं।" FIIDS ने एक बयान में कांग्रेस से F-1 और J-1 वीज़ा होल्डर्स के लिए 'ड्यूरेशन-ऑफ-स्टेटस' प्रोटेक्शन को बहाल करने की मांग की। इसने उन ग्रेजुएट और STEM प्रोग्राम्स के लिए कानूनी छूट का भी प्रस्ताव दिया, जिन्हें पूरा करने में औसतन 48 महीने से ज़्यादा समय लगता है; इसके लिए 64 महीने की सीमा और ऑटोमैटिक एक्सटेंशन का सुझाव दिया गया। 

FIIDS ने USCIS से शासनिक राहत देने को कहा
इस ग्रुप ने USCIS और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी से नियम लागू होने से पहले प्रशासनिक राहत देने को कहा। इसके प्रस्तावों में अच्छे एकेडमिक रिकॉर्ड वाले स्टूडेंट्स के लिए ऑटोमैटिक एक्सटेंशन, चार साल की गणना से OPT और STEM OPT को बाहर रखना, फ़ॉर्म I-539 आवेदनों की तेजी से प्रोसेसिंग और 60 दिन की ग्रेस अवधि को बहाल करना शामिल है। FIIDS ने कहा कि ऑटम 2025 में नए इंटरनेशनल एनरोलमेंट में 17 प्रतिशत की गिरावट आई, जो महामारी के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। इसके अनुमान के मुताबिक, इस गिरावट के कारण 1.1 बिलियन डॉलर से ज़्यादा का रेवेन्यू नुकसान हुआ और लगभग 23,000 कम नौकरियां पैदा हुईं।

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